Dainik Athah

प्रत्याशि करते रहे आर्थिक मदद का इंतजार, नहीं हुई नसीब

प्रत्याशियों को मदद के मामले में भाजपा से आगे रही कांग्रेस- सपा

भाजपा ने लगाया था अधिकांश अपने विधायकों पर दांव

संगठन को अवश्य भेजी मदद, लेकिन वह भी पूरी नहीं

अथाह ब्यूरो
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश विधानसभा के चार चरणों का चुनाव पूर्ण हो चुका है। चुनाव में भाजपा की सपा गठबंधन से कांटे की टक्कर है यह भी किसी से छुपा हुआ नहीं है। इस चुनाव में प्रदेश एवं केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के मुकाबले प्रत्याशियों को आर्थिक मदद करने के मामले में सपा- कांग्रेस आगे रही है। भाजपा प्रत्याशी अंत तक आर्थिक मदद की बाट ही जोहते रहे।

बता दें कि बसपा एवं रालोद को छोड़कर अधिकांश राजनीतिक दल चुनावों के दौरान अपने प्रत्याशियों की आर्थिक मदद करते रहे हैं। कांग्रेस द्वारा शुरू की गई इस परंपरा को भाजपा ने भी अपना लिया था। बसपा का जैसा स्वभाव है उसमें आर्थिक मदद की उम्मीद करना बेमानी होगी। वहीं, रालोद जैसी पार्टी भी प्रत्याशियों की आर्थिक मदद नहीं करती। लेकिन कांग्रेस की देखादेख समाजवादी पार्टी भी अपने प्रत्याशियों की आर्थिक मदद करती रही है। मुझे याद है दो दशक से तो भाजपा भी प्रत्याशियों की आर्थिक मदद करती आ रही है।

यदि वर्तमान चुनाव की बात करें तो कांगे्रस ने प्रत्याशी घोषित करने के एक सप्ताह के अंदर ही आर्थिक मदद पहुंचा दी थी। इसका कुछ ने उपयोग किया, कुछ की बात करें तो उन्होंने इस मदद में से बचा लिया।

सपा ने भी अपने प्रत्याशियों को आर्थिक मदद पहुंचाई। सहयोगी दलों को मदद पहुंचाने के मामले में सपा नेता भी चुप्पी साध लेते हैं। सूत्रों के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोरी के बावजूद सपा ने प्रत्याशियों को मदद पहुंचाई।

अब बात भाजपा की करें तो पार्टी ने पहली बार प्रत्याशियों को मदद पहुंचाने से हाथ खींच लिये। प्रत्याशी मतदान के बाद तक आर्थिक सहायता का इंतजार करते रहे। लेकिन आला नेता चुप्पी साधे रहे। भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व ने सोच लिया था कि जब वह विधायकों को प्रत्याशी बना रही है तो उन्हें मदद की कहां आवश्यकता होगी। स्थिति यह है कि जिन विधायकों ने सरकार रहने के दौरान चाहे पैसे न कमाये हों, लेकिन पार्टी ऐसा कहां मानती है।

सूत्रों की मानें तो पार्टी ने जिला महानगर अध्यक्षों को अवश्य पैसा भेजा। वह बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल अध्यक्ष, विधानसभा प्रभारी के लिए थे। इसके साथ ही बाहर से आने वालों के खर्चे के लिए रकम दी गई थी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भाजपा के एक पदाधिकारी कहते हैं कि जितना पैसा पार्टी से मिला था उससे अधिक खर्च हुआ। पार्टी को खर्चा भेजा जा रहा है, पता नहीं कब मिलेगा। एक भाजपा पदाधिकारी कहते हैं कि चंदा मिलने के मामले में पार्टी सबसे आगे है, लेकिन खर्च करने में फिसड्डी। इस मामले में भाजपा के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक बड़े पदाधिकारी से चुनाव के दौरान बात हुई तो वे भी इस मामले को टाल गये।

इससे यहीं कहा जा सकता है कि चंदा प्राप्त करने के मामले में आगे रहने वाली पार्टी कांग्रेस- सपा से पिछड़ गई। हां यह अवश्य है कि प्रचार प्रत्याशियों के पास अवश्य भेजी गई थी।

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