Dainik Athah

राजग का हिस्सा राष्टÑीय लोकदल के मुखिया जयंत चौधरी पकड़ सकते हैं अलग राह!

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र- प्रदेश की राजनीति में होंगे चौंकाने वाले निर्णय

विधानसभा चुनाव से पहले रालोद- सपा में गठबंधन की फिर जगी उम्मीद

इन दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ताबड़तोड़ रैलियां कर संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं जयंत चौधरी


अशोक ओझा
नयी दिल्ली।
राष्टÑीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा बनकर भारतीय जनता पार्टी के साथ कदम ताल कर रहा जयंत चौधरी का राष्टÑीय लोकदल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले क्या अलग राह पकड़ेगा?, यह बड़ा सवाल है। बरबस ही कोई इसके ऊपर भरोसा नहीं करेगा। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई है। यह भी संभव है अगले एक से दो माह में यह बदलाव आपको नजर आये।
बता दें कि राष्टÑीय लोकदल ने 2022 का विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के गठबंधन से लड़ा था। रालोद ने इस चुनाव में नौ सीटें जीती थी। इसके बाद 2024 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले सपा- रालोद का गठबंधन टूट गया और रालोद राजग का सहयोगी बन गया। लोकसभा चुनाव रालोद ने भाजपा के साथ मिलकर लड़ा था। इस चुनाव में रालोद दो सीटें जीतने में सफल हो गया था। इसके साथ ही जयंत चौधरी जहां केंद्र सरकार में स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री बनें, वहीं उत्तर प्रदेश सरकार में भी शामिल हो गया और रालोद कोटे से एक मंत्री बनाये गये।
पिछले कुछ समय से रालोद मुखिया जयंत चौधरी अपने संगठन की तरफ विशेष रूप से ध्यान दे रहे हैं। इसी कड़ी में गाजियाबाद के पूर्व सांसद एवं राज्यसभा सदस्य रह चुके केसी त्यागी को जोरशोर से राष्टÑीय लोकदल में शामिल किया गया। इसको लेकर कहा गया कि आगामी चुनावों को देखते हुए रालोद भाजपा से नाराज त्यागी समाज को अपने पक्ष में जोड़ने का काम कर रहा है। केसी त्यागी भी इसका लाभ उठाने की जुगत में है और लगातार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय है।
उच्च पदस्थ सूत्रों पर भरोसा करें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राष्टÑीय लोकदल की राजग से राहें जुदा होगी। रालोद, भाजपा से अलग होने के बाद एक बार फिर सपा से गठबंधन कर सकता है। विधानसभा चुनाव दोनों ही पार्टियां मिलकर लड़ेगी। इसका लाभ सीधे सीधे रालोद और सपा को होगा। लेकिन भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव में राह कठिन हो सकती है। इसका कारण यह है कि जाट- मुस्लिम गठजोड़ एक बार फिर प्रदेश में नजर आ सकता है।

रालोद से डरे भाजपा विधायकों को राहत के साथ ही खतरा भी
अभी तक रालोद के प्रभाव वाली विधानसभा सीटों को लेकर भाजपा के वर्तमान विधायक आशंकित है कि पता नहीं रालोद किन किन सीटों को भाजपा से मांगेगा और भाजपा कौन कौन सी सीटें रालोद को दे सकती है। लेकिन इस खबर से भाजपा के वर्तमान जाट विधायकों को टिकट के मामले में तो राहत मिल सकती है, लेकिन उन विधायकों की चिंता बढ़ा सकती है जो बहुत कम अंतर से विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बनें थे।

लगातार रैलियां कर संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं जयंत चौधरी
राष्टÑीय लोकदल की तैयारियां भी इसके संकेत दे रही है कि रालोद की राहें भाजपा से अलग होगी। राष्टÑीय लोकदल के मुखिया और केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने पिछले माह बागपत लोकसभा के इकड़ी में बड़ी जनसभा की थी। इसके बाद उन्होंने पांच जून को मुरादाबाद की कांठ विधानसभा में बड़ी रैली की थी। अब दस जून को शामली में वे बड़ जनसभा करने जा रहे हैं। जिस प्रकार रालोद ताबड़तोड़ रैलियां कर रहा है उससे भी भाजपा खेमा कुछ चिंतित है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *