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बसंत ऋतु का पावन पर्व है फुलैरा दूज-पंडित शिवकुमार शर्मा

1 मार्च को साध्य योग में मनाई जाएगी फुलेरा दूज

फुलेरा दूज बसंत पंचमी की तरह ही बसंत ऋतु का त्यौहार है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया को यह पर्व मनाया जाता है। 27 योगों में से प्रमुख उत्तम योग साध्य योग होता है। साध्य का अर्थ होता है कि इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति  का योग।इस समय प्रकृति में फूलों की बहार, और नई फसलों व गेहूं की बाल,आम पर मंजरी की सुगंध से वातावरण सुगंधित हो जाता हैं।आम के वृक्ष पर कोयल अपने मीठे स्वर से प्रकृति को मीठे संगीत सुनाती है। ज्योतिष के अनुसार इस दिन शुक्र और चंद्रमा का मिलन मीन राशि में हो रहा है। जो जनता में हर्षोल्लास ,खुशी और रोमांस का  माहौल मना रहा है।कहा जाता है कि भगवान कृष्ण और राधा का प्रथम मिलन इसी दिन हुआ था। उन्होंने फूलों  से भगवान कृष्ण का स्वागत किया था। इस पर्व को राधा कृष्ण के पवित्र प्रेम का प्रतीक माना जाता है।और इसी दिन से ब्रज क्षेत्र में फूलों की होली आरंभ हो जाती है।फुलेरा दूज वैवाहिक मुहूर्त में स्वयं सिद्ध मुहूर्त (अनबूझ विवाह मुहूर्त) है। अर्थात बिना किसी विद्वान से शादी का मुहूर्त निकलवाए भी विवाह कर सकते हैं।ग्रामीण अंचलों में सरसों आदि के पुष्प इकट्ठे करके लड़कियां और कन्याएं सबके घरों में फूल बिखरती हैं।

अर्थात फाल्गुन शुक्ल पक्ष आरंभ होते ही प्रकृति में अनोखा आनंद आरंभ हो जाता है। मौसम में थोड़ी सी उष्णता आ जाती है।प्रातः काल अपने दैनिक पूजा के समय राधा कृष्ण,लक्ष्मीनारायण , शिव पार्वती, सीता राम आदि युगल देवताओं की प्रार्थना  स्तुति करें और नए ताजे प्राकृतिक फूल सभी देवता पर और मंदिर में  चढ़ाएंऔर प्रार्थना करें कि हमारे घर और  समाज में सदैव बसंत बना रहे।

पंडित शिवकुमार शर्मा, ज्योतिषाचार्य इन वास्तु कंसलटैंट गाजियाबाद

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