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भाजपा की प्रदेश कमेटी के साथ ही जिलों में दिखेगा बदलाव

राष्टÑीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद लखनऊ की तरफ लगी नजरें

प्रदेश के साथ ही जिलों में बदलाव को लेकर बढ़ रही चिंता

चुनावी वर्ष होने के कारण बड़ा रिस्क लेने की उम्मीद कम

बड़ा बदलाव होने से निकाय चुनाव समेत अन्य चुनावों पर हो सकता है असर

अशोक ओझा
लखनऊ।
भारतीय जनता पार्टी की राष्टÑीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद पूरे प्रदेश के पार्टी नेताओं की निगाह राजधानी लखनऊ की तरफ लग गई है। भाजपा में प्रदेश से लेकर जिलों तक बदलाव तो दिखेंगे, लेकिन चुनावी वर्ष होने के कारण यह बदलाव बड़ा होने की उम्मीद कम है। इस कारण ऐसे जिलाध्यक्ष राहत की सांस ले सकते हैं जिनके खिलाफ कोई गंभीर शिकायत नहीं है। हां इतना अवश्य है कि कुछ क्षेत्रीय अध्यक्षों को किनारे किया जा सकता है।
बता दें कि दिल्ली में हुई भाजपा की राष्टÑीय कार्यकारिणी की बैठक में राष्टÑीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को डेढ़ वर्ष का अतिरिक्त कार्यकाल मिल गया। इसके साथ ही देशभर से आये प्रदेश अध्यक्षों एवं प्रदेश महामंत्री संगठन को एक टास्क के साथ रवाना किया गया है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के साथ ही सबसे अधिक लोकसभा सीटों वाला प्रदेश भी है। केंद्र में सरकार बनाने में उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा योगदान होता है। इसके साथ ही महत्वपूर्ण यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उत्तर प्रदेश का ही प्रतिनिधित्व करते हैं। इस कारण भी उप्र का महत्व अधिक है।
भाजपा सूत्रों की मानें तो राष्टÑीय कार्यकारिणी में प्रदेशों के नेताओं खासकर उत्तर प्रदेश के नेतृत्व को यह संकेत दिये गये हैं कि प्रदेश कमेटी से उन लोगों की छुट्टी की जाये जो केवल पद पाकर पार्टी पर बोझ बन गये हैं। इसके साथ ही जिनके पास मंत्री पद अथवा कोई लाभ का पद है ऐसे लोगों को हटाकर ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को संगठन में स्थान दिया जाये। लेकिन सूत्र यह भी बताते हैं कि करीब 30 फीसद बदलाव प्रदेश कमेटी में होंगे। इसमें मंत्रियों से पद वापस लेने के साथ ही कई मोर्चों के प्रदेश अध्यक्ष भी बदले जायेंगे। साथ ही कई क्षेत्रीय अध्यक्षों को भी बदलने का मन नेतृत्व बना चुका है।
सूत्रों की मानें तो जिला एवं महानगरों के ऐसे अध्यक्षों को भी बदलने का मन प्रदेश नेतृत्व ने बना लिया है जो लगातार दूसरी बार अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इनमें से ऊर्जावान अध्यक्षों को पदोन्नति का तोहफा दिया जा सकता है। इसके साथ ही जिन अध्यक्षों के खिलाफ गंभीर शिकायतें है उनको भी हटाने का काम प्रदेश नेतृत्व करेगा। यदि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देखें तो यहां पर करीब एक दर्जन अध्यक्षों पर तलवार लटकती नजर आ रही है। इनके क्षेत्रों में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा है। लेकिन जिनका प्रदर्शन बेहतर रहा है वहां पर छेड़छाड़ की संभावना बहुत कम है। प्रदेश नेतृत्व के इरादे क्या है इसका संकेत 22 जनवरी को होने वाली प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक से भी मिल जायेगा।

चुनावी वर्ष होने के कारण कइयों की बच सकती है कुर्सी

भाजपा सूत्रों के अनुसार वर्तमान समय में विधान परिषद की शिक्षक एवं स्नातक सीटों के चुनाव चल रहे हैं। इसके साथ ही सहकारी समितियों, गन्ना समितियों के चुनाव होने हैं। अप्रैल से निकाय चुनाव की रणभेरी बजनी तय मानी जा रही है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि इतनी जल्दी बड़ा बदलाव पार्टी की सेहत के लिए ठीक नहीं रहेगा।

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