Dainik Athah

यहां धर्म बदल जाता है, जाति नहीं: अखिलेश यादव

भारत जैसा सामाजिक भेदभाव दुनिया में कहीं नहीं

अथाह ब्यूरो
लखनऊ।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भारत जैसा सामाजिक भेदभाव दुनिया में कहीं नहीं है। यहां धर्म बदल जाता है, जाति नहीं। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर और डा. राम मनोहर लोहिया जैसे विचारकों ने जाति तोड़ो अभियान चलाया पर जाति नहीं टूटी। पिछड़ों, दलितों, वंचितों को उनका हक और सम्मान दिलाने की यह लड़ाई लंबी और कठिन जरूर है, पर उम्मीद है कि हम यह लड़ाई जीतेंगे।

अखिलेश यादव मंगलवार को समाजवादी पार्टी प्रदेश मुख्यालय में कमल किशोर कठेरिया द्वारा लिखित भागीदारी का संघर्ष पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी, विधायक बृजेश कठेरिया, रमेश चंचल, एएच हाशमी तथा भंते महेन्द्रजी व अन्य समाजवादी नेता उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि हमें साथ मिलकर सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़नी होगी क्योंकि हमारी लड़ाई जिनसे है वे बहुत ताकतवर हैं और हर जगह हर संस्थान में उनका कब्जा है। समाजवादी पार्टी ने अपने चुनाव घोषणापत्र में सरकार बनने पर तीन महीने के अन्दर जातीय जनगणना कराने का वादा किया था।

अखिलेश यादव ने कहा कि आजादी के 75वें वर्ष में हम जब आजादी की खुशी मना रहे थे तब पड़ोसी राज्य से यह दु:खद खब़र आई कि एक टीचर ने एक बच्चे को ऐसा पीटा कि उसकी मौत हो गई। उसकी गलती यह थी कि उसने उनके मटके से पानी पी लिया था। इस भेदभाव से समाज में बहुत दूरी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि जातीय भेदभाव सामाजिक जनजागरूकता से मिट सकता है। इसके लिए समाज को जागरूक करना होगा। वस्तुस्थिति की सही जानकारी लोगों तक पहुंचनी चाहिए। सत्ता दल तो सच को झूठ बनाने में माहिर है।

कमल किशोर कठेरिया (पूर्व राजस्व सेवा अधिकारी) ने कहा देश में चार हजार वर्षों से दो विचारधाराएं चल रही हैं। एक नफरत की और दूसरी सद्भाव की। उन्होंने कहा बहुसंख्यक विभाजित है। आरक्षण को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम और विवाद है। पुस्तक का उद्देश्य सही जानकारी देना है ताकि आरक्षण पर सार्थक बहस हो सके। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के नेतृत्व को मजबूत करेंगे तभी संविधान बचेगा। अखिलेश का नेतृत्व ही उत्तर प्रदेश में विकल्प है।

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