Dainik Athah

दो दिवसीय बैठक के बाद बदल सकती है भाजपा नेतृत्व की रणनीति

– जिला पंचायत अध्यक्ष- ब्लाक प्रमुख चुनाव में जीत को प्राथमिकता
– दोनों चुनावों के बाद संगठन- सरकार में होगा बदलाव
– मंत्रियों ने ब्यूरोक्रेसी द्वारा सुनवाई न करने की रखी बात
– पंचायत चुनावों में जन प्रतिनिधियों की सिफारिश पर टिकट न देना पड़ा भारी

अशोक ओझा
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन के साथ ही सरकार में बदलाव को लेकर कई दिनों से चल रहे मंथन को अब कुछ दिनों के लिए ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है। इसका कारण यह है कि भाजपा पहले जिला पंचायत अध्यक्षों एवं ब्लाक प्रमुख चुनावों में विजय हासिल कर पंचायत चुनाव में हुई किरकिरी के दाग को धोना चाहती है। दो दिनी बैठकों के दौर में जो तथ्य सामने आये हैं उन्हें केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखा जायेगा। इसके साथ ही सरकार में बदलाव की योगी आदित्यनाथ की अनिच्छा को भी नेतृत्व के सामने रखा जायेगा।


बता दें कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में हुई भाजपा की फजीहत एवं साथ ही प्रदेश में बन रहे सत्ता विरोधी माहौल को लेकर भाजपा नेतृत्व चिंतित है। नेतृत्व की चिंता 2022 के विधानसभा चुनाव में जहां जीत हासिल करने की है, वहीं दूसरी तरफ 2022 के सहारे भाजपा 2024 की कहानी लिखना चाहती है। इसको लेकर दिल्ली में चली मैराथन बैठकों के बाद भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष एवं प्रदेश प्रभारी व राष्टÑीय उपाध्यक्ष राधा मोहन सिंह को लखनऊ के दो दिवसीय दौरे पर भेजा गया। दोनों नेताओं ने दो दिन में मुख्यमंत्री के साथ ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश संगठन महामंत्री, सह संगठन महामंत्रियों के साथ ही दोनों उप मुख्यमंत्रियों एवं एक दर्जन से अधिक मंत्रियों से अलग- अलग मुलाकात की गई।


भाजपा सूत्रों के अनुसार जो भी लोग दोनों केंद्रीय नेताओं से मिले उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि सरकार में ब्यूरोक्रेसी हावी है। इसके चलते न तो मंत्रियों की सुनवाई होती है, न विधायकों की। इस स्थिति में भाजपा पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की सुनवाई होगी यह तो सोचा भी नहीं जा सकता। इसके साथ ही पंचायत चुनावों के संबंध में बताया गया कि सांसदों एवं विधायकों के रिश्तेदारों, खास लोगों को टिकट न देने की घोषणा, बड़े पदाधिकारियों के रिश्तेदारों को टिकट न देने की घोषणा का संदेश गलत गया। इसके चलते जन प्रतिनिधि एवं पदाधिकारी घर बैठ गये। परिणाम हार के रूप में सामने आया है।


सूत्रों के अनुसार संगठन एवं सरकार में बदलाव नेतृत्व को आसान नहीं लग रहा। यहीं कारण है कि दोनों को दूसरी वरीयता पर रख दिया गया है। पहली वरीयता जिला पंचायत अध्यक्षों के साथ ही ब्लाक प्रमुख चुनावों में भाजपा प्रत्याशियों को विजयी बनाने के निर्देश दिये गये हैं। इस जीत से पंचायत चुनाव में हुई हार के दाग को भी धोया जा सकता है।
बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कितनी गंभीर मंत्रणा हुई यह साबित करने के लिए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का बयान ही काफी है जिसमें उन्होंने कहा 2022 में 300 पार। दूसरे दिन मौर्या के अलावा दिनेश शर्मा, श्रीकांत शर्मा, स्वामी प्रसाद मौर्या, सिद्धार्थ नाथ सिंह , लक्ष्मी नारायण समेत अनेक मंत्री दोनों नेताओं से मिले।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *