भाजपा के जिला प्रभारियों की नियुक्ति को लेकर उठने लगे सवाल
बगैर मेहनत के किसकी कृपा से लगातार पा रहे पद
ऐसे लोग कैसे लगायेंगे पार्टी की नैया पार
अशोक ओझा
मेरठ/ गाजियाबाद। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने प्रदेश के सभी जिलों में जिला प्रभारियों की घोषणा की तो सूची में शामिल लोगों के ऊपर सवाल भी उठने लगे हैं।
जिस प्रकार जिला प्रभारी नियुक्त किये गये हैं उनमें कई नाम तो ऐसे हैं जो न तो यह देखते कि उन्हें कहां भेजा जा रहा है अथवा क्या काम दिय जा रहा है, उनकी निष्ठा संगठन में है और वे लगातार कार्य में जुटे रहते हैं। इसके साथ ही कई ऐसे लोग भी सूची में शामिल है जो संगठन के निर्देश अथवा आदेश का पालन करना चाहते हैं, वे बस इतना चाहते हैं कि उन्हें काम मिलता रहे और वे खबरों में बनें रहें।
इसके साथ ही ऐसे लोगों को भी प्रभारी नियुक्त किया गया है जिन्होंने बगैर संगठन में नीचे के स्तर पर काम किये बगैर ही जिला प्रभारी के पद प्राप्त कर लिये हैं। यह कोई पहली बार नहीं है कि ऐसे लोगों को जिलों में प्रभारी नियुक्त किया गया है ऐसे लोग प्रदेश संगठन के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को हथिया लेते हैं। अब कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि आखिर बगैर मेहनत के ऐसे लोग किस प्रकार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां प्राप्त करते जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं की मानें तो ऐसे प्रभारी जब जिलों में जाते हैं तो वीवीआईपी की तरह जाते हैं और उसी प्रकार का सम्मान भी हासिल हो यह उम्मीद कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों से करते हैं।
भाजपा में ऐसे लोगों को प्रभारी नियुक्त किये जाने पर बहस शुरू हो गई है, वहीं दूसरी तरफ देखें तो बड़ी संख्या में ऐसे भी कार्यकर्ता है जिनकी मेहनत से पार्टी के बड़े नेता भी इनकार नहीं कर सकते, लेकिन ऐसे लोगों को किसी भी जिले की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है जिसके चलते वे खुद को ठगे से महसूस कर रहे हैं।
… तो क्या जिला प्रभारियों को नहीं लड़वाया जायेगा चुनाव!
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा घोषित जिला प्रभारियों की सूची में बड़ी संख्या में ऐसे भी नाम है जो खुद 2027 का विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। अब इनको लेकर कयास लगाये जा रहे हैं कि इनके नामों पर क्या चुनाव लड़ाने पर विचार किया जायेगा।
घोषित सूची में पश्चिम से लेकर सभी क्षेत्रों में चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों के नाम बड़ी संख्या में शामिल है। जो आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। इसके साथ ही कुछ लोग तो विधान परिषद चुनाव की तैयारी में भी जुटे हैं। इनमें ऐसे लोग भी जो है प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं और किसी जिले के प्रभारी हैं। अब पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में जोरशोर से चर्चा शुरू हो गई है कि जिलों के प्रभारियों की जिम्मेदारी यह है कि वे अपने प्रभार के जिले में भाजपा को 2027 में विजयश्री दिलवायें। अब यह देखना होगा कि कितने प्रभारी ऐसे होंगे जो इस चर्चा के बाद विचार करेंगे कि कोई न कोई बहाना बनाकर प्रभारी पद से मुक्ति प्राप्त कर लें।
