नौतपा के 9 दिन मानसून लाने में सहायक होता हैं

वर्ष 2026 में नौतपा 25 मई से आरंभ होकर 2 जून तक रहेगा। ये वह 9 दिन माने जाते हैं जब सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के बाद गर्मी अपने चरम पर होती है। 25 मई को अपराह्न 15:38 बजे सूर्य रोहिणी नक्षत्र में आएंगे। वैसे तो सूर्य एक नक्षत्र में लगभग 15 दिन रहते हैं। लेकिन नौतपा काल में रोहिणी नक्षत्र में पहले 9 दिन बहुत ही महत्वपूर्ण है।25 मई से 2 जून तक में यदि भीषण गर्मी पड़ती है तो पूरे वर्ष मानसून बहुत अच्छा होता है। पर्याप्त वर्षा होती है। यदि पश्चिमी विक्षोभ या नीनो आदि पर्यावरणीय प्रभाव के कारण इस 9 दिन की अवधि में वर्षा अथवा आंधी आती है तो नौतपा भंग हो जाता है। इसके कारण मानसून काल में अर्थात वर्षा ऋतु में वर्षा की अनियमितता रहती है। ऐसा कृषि वैज्ञानिकों का भी मानना है।ऐसा माना जाता है कि सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश से पृथ्वी पर ताप प्रभाव बढ़ता है। रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा होते हैं। जब सूर्य की प्रचंड किरणें सागर में पड़ती है तो चंद्रमा के नक्षत्र के प्रभाव से समुद्र के पानी को भाप बादल बनकर मानसून का रूप ले लेती है।लगभग 20 दिन से एक माह के बीच पूरे भारतवर्ष में मानसून सक्रिय हो जाता है और अच्छी वर्षा का संकेत होता है।परंपरागत ज्योतिष में कहा जाता है कि यदि नौतपा में अच्छी तपिश पड़े तो आगे वर्षा की स्थिति अनुकूल हो सकती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार में इन दिनों सूर्य देव को जल अर्पण, दान, और सूर्य स्तुति का महत्व माना जाता है। योग्य पात्र कोजल दान, छाया दान, फल ,शीतल वस्तुओं का दान करना चाहिए ।

