Dainik Athah

गंगा एक्सप्रेस वे: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए बना वरदान

मेरठ से प्रयागराज: 594 किमी लंबा एक्सप्रेस वे लगायेगा पश्चिम को पंख

अब एक दिन में लखनऊ से वापस लौट सकते हैं पश्चिम के लोग

प्रयागराज भी हुआ नजदीक, अन्य जिलों की दूरी भी हुई कम


अशोक ओझा
मेरठ/ गाजियाबाद।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक विधायक विधानसभा के विशेष सत्र में शामिल होने के लिए 29 अप्रैल को गाजियाबाद से लखनऊ रवाना हुए। उन्होंने गंगा एक्सप्रेस वे का रूख किया। उन्हें ये हाइवे इतना अच्छा और सुगम लगा कि अगले दिन भी गंगा एक्सप्रेस वे से ही वापस लौटे। उन्होंने कहा इससे अच्छा उपहार पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नहीं हो सकता।
यह एक हकीकत है कि इसके बाद जिस किसी ने भी गंगा एक्सप्रेस वे से सफर किया उसने इसकी जमकर सराहना की। मेरठ के रहने वाले विजय कुमार ने जब इस एक्सप्रेस वे पर 120 की रफ्तार पकड़ी तो उनका कहना था इससे साफ और किस एक्सप्रेस वे पर मिलेगी। उनका कहना था कि इस हाइवे से पश्चिम के साथ ही पूर्व की दूरियां कम होगी। जो सफर आठ से नौ घंटे में पूरा होता था वह पांच घंटे से भी कम समय में पूरा हो गया।
एक अन्य का कहना है कि यह सिर्फ एक सड़क नहीं, यह उत्तर प्रदेश की वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर दौड़ता हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर है। नवनिर्मित गंगा एक्सप्रेसवे पर सिर्फ गाड़ियां ही नहीं फरार्टा भरेंगी, उद्योग, निवेश, सपने और अवसर भी दौड़ेंगे। मेरठ से प्रयागराज तक विस्तारित यह सड़क वास्तव में एक नई आर्थिक धारा है, जो उत्तर प्रदेश को विकास की उस गति तक ले जाने जा रही है, जहां ह्लवन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमीह्व का लक्ष्य हकीकत बनता दिखाई देगा।

पश्चिम से पूर्व को जोड़ने वाला विकास का कॉरिडोर
गंगा एक्सप्रेसवे 594 किमी लंबा ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे है, जो मेरठ से प्रयागराज तक 12 जिलों को एक सशक्त आर्थिक धुरी में पिरोता है। 6 लेन (भविष्य में 8 लेन तक विस्तार योग्य) वाला यह मेगा प्रोजेक्ट लगभग 36-37 हजार करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मॉडल पर विकसित किया गया है। यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विकसित औद्योगिक बेल्ट को पूर्वांचल के कृषि और श्रम-आधारित क्षेत्रों से सीधे जोड़ते हुए उत्पादन, आपूर्ति और बाजार के बीच दूरी को कम करता है। परिणामस्वरूप, यह केवल यातायात का मार्ग नहीं, बल्कि निवेश, उद्योग और रोजगार को गति देने वाला वह कनेक्टिविटी इंजन है, जो प्रदेश की आर्थिक ताकत को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखता है।

12 जिलों को जोड़ने वाला अद्भुत हाइवे
गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 जिलों को जोड़ते हुए एक व्यापक आर्थिक परिवर्तन की नींव रखता है। इन जिलों की भौगोलिक और आर्थिक विशेषताओं के अनुरूप विकास की नई संभावनाएं उभर रही हैं। मेरठ-हापुड़ में मैन्युफैक्चरिंग और स्पोर्ट्स गुड्स, बुलंदशहर-अमरोहा में फूड प्रोसेसिंग और डेयरी, शाहजहांपुर-हरदोई में एग्री-बेस्ड इंडस्ट्री, उन्नाव-रायबरेली में टेक्सटाइल और एमएसएमई, जबकि प्रयागराज लॉजिस्टिक्स और टूरिज्म हब के रूप में विकसित हो सकता है। इस तरह, यह एक्सप्रेसवे अलग-अलग आर्थिक क्षमताओं वाले इन जिलों को एकीकृत करते हुए उन्हें एक सिंगल, इंटरकनेक्टेड इकोनॉमिक नेटवर्क में बदल देता है, जहां उत्पादन, प्रसंस्करण और वितरण एक ही विकास धारा में प्रवाहित होते हैं।

सिमट गई जिलों की दूरियां, अन्य सड़कों पर दबाव होगा कम
यदि किसी को गाजियाबाद या मेरठ अथवा सहारनपुर से शाहजहांपुर जाना हो, हरदोई जाना हो अथवा बरेली। जाने वाले को सोचना पड़ता था कि कितना समय लगेगा। लेकिन इस एक हाइवे ने सभी जिलों की दूरियां कम कर दी है। मुरादनगर के विधायक अजीत पाल त्यागी कहते हैं कि लखनऊ जाने के लिए अब सोचना नहीं पड़ेगा। पता है चार से पांच घंटे में लखनऊ पहुंच जायेंगे।

वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी का आधार

उत्तर प्रदेश ने 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसमें गंगा एक्सप्रेसवे एक मजबूत आधार स्तंभ की भूमिका निभाने जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी निवेश को आकर्षित करती है, निवेश से उद्योग स्थापित होते हैं, उद्योग रोजगार पैदा करते हैं, रोजगार से लोगों की आय बढ़ती है और बढ़ी हुई आय व्यापक आर्थिक विस्तार का मार्ग प्रशस्त करती है। इसी क्रम में गंगा एक्सप्रेसवे एक इकोनॉमिक मल्टीप्लायर के रूप में कार्य करेगा, जो विकास की इस पूरी श्रृंखला को गति देता हुआ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है।

क्या कहते हैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विधायक


गंगा एक्सप्रेस वे से पहले ही दिन सफर किया, इस रास्ते में न कोई जाम का झाम और साथ ही गाजियाबाद से लखनऊ की दूरी भी कम हो गई है। यदि स्पष्ट रूप से कहा जाये तो यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का तोहफा है। इस हाइवे ने पश्चिम से लखनऊ, प्रयागराज ही नहीं 12 जिलों की दूरी को कम कर दिया है। अब हम यहीं कह सकते हैं लखनऊ अब दूर नहीं। मोदी जी और योगी जी का आभार। मुख्यमंत्री योगी आदियत्यनाथ ने जो 15 दिन की टोल में छूट दी है उससे भी लोगों में सफर का रोमांच बढ़ा है।

अजीत पाल त्यागी, विधायक मुरादनगर

मैंने लखनऊ से वापस आते समय गंगा एक्सप्रेस वे से सफर का आनंद लिया। सच मानो को यह हाइवे पश्चिम के साथ ही पूर्व वालों के लिए भी उपहार है। न किसी प्रकार की थकान और शुद्ध हवा। हालांकि जनसुविधाओं पर काम चल रहा है। इस हाइवे से लखप्ऊ से मोदीनगर साढ़े चार से पांच घंटे में सफर पूरा हो जाता है तथा जाम से भी बचा जाता है। पश्चिम वालों को गंगा एक्सप्रेस वे से सफर अवश्य करना चाहिये।
डा. मंजू शिवाच, विधायक मोदीनगर


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *