औद्योगिक सौहार्द एवं शांति बनाए रखने हेतु हाई लेवल कमेटी की बैठकें जारी
कमेटी ने आउटसोर्सिंग एजेंसियों की जिम्मेदारियां की निर्धारित
आउटसोर्सिंग एजेंसी या एजेंसी के श्रमिकों द्वारा उपद्रवी व्यवहार करने पर एजेंसी को ब्लैकलिस्टेड करने के साथ-साथ लाइसेंस निरस्तीकरण की होगी कार्रवाई
आउटसोर्सिंग एजेंसी/संविदाकार न्यूनतम वेतन, बैंक भुगतान एवं श्रमिक हितों का रखें विशेष ध्यान
श्रम विभाग द्वारा समस्याओं के समाधान हेतु स्थापित किया गया है कॉल सेंटर

अथाह संवाददाता
गौतमबुद्धनगर। जनपद में औद्योगिक सौहार्द एवं शांति बनाए रखने तथा उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी गाइडलाइंस का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित हाई लेवल कमेटी द्वारा बहुचरणीय बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में बुध्वार को कलेक्ट्रेट कक्ष में औद्योगिक विकास आयुक्त एवं हाई लेवल कमेटी के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में आउटसोर्सिंग एजेंसियों/संविदाकारों की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें अपर मुख्य सचिव लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग उत्तर प्रदेश आलोक कुमार, प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन विभाग उत्तर प्रदेश एमकेएस सुंदरम, श्रम आयुक्त उत्तर प्रदेश कानपुर माकंर्डेय शाही सहित संबंधित अधिकारीगण एवं औद्योगिक इकाइयों आउटसोर्सिंग एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक में हाई लेवल कमेटी द्वारा स्पष्ट किया गया कि आउटसोर्सिंग एजेंसियां/संविदाकार उद्योगों के संचालन एवं रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपने श्रमिकों को अनुशासित रखें तथा उन्हें इस प्रकार प्रशिक्षित करें कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अशांति की स्थिति उत्पन्न न हो। कमेटी द्वारा सख्त निर्देश दिए गए कि यदि किसी एजेंसी अथवा उसके कर्मचारी/श्रमिक द्वारा उपद्रवी व्यवहार किया जाता है, तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की मानी जाएगी तथा एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के साथ-साथ उसका लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
कमेटी द्वारा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन के अनुपालन पर विशेष बल दिया गया तथा निर्देशित किया गया कि अकुशल श्रमिकों को 13,690, अर्धकुशल श्रमिकों को 15,059 एवं कुशल श्रमिकों को 16,868 प्रतिमाह वेतन का भुगतान अनिवार्य रूप से किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी श्रमिकों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित किया जाए। श्रम आयुक्त द्वारा निर्देशित किया गया कि सभी कर्मकारों का जॉइनिंग के समय पुलिस सत्यापन कराया जाए तथा भविष्य निधि एवं कर्मचारी राज्य बीमा की कटौती नियमानुसार सुनिश्चित की जाए, जिससे श्रमिकों में किसी प्रकार की असंतोष की भावना उत्पन्न न हो।
इसके अतिरिक्त, श्रम विभाग द्वारा स्थापित स्थायी कॉल सेंटर के टोल-फ्री नंबर 9411900251 सभी आउटसोर्सिंग एजेंसियों को उपलब्ध कराए गए। निर्देशित किया गया कि किसी भी विपरीत परिस्थिति अथवा आवश्यकता की स्थिति में इस टोल फ्री नंबर पर तत्काल संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जिससे समस्याओं का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में यह भी कहा गया कि उद्योग, श्रमिक एवं नियोजक एक-दूसरे के पूरक हैं और औद्योगिक गतिविधियों के सुचारु संचालन से ही रोजगार के अवसर सुरक्षित रहते हैं तथा प्रदेश के समग्र विकास को गति मिलती है। यदि औद्योगिक गतिविधियां बाधित होती हैं तो इसका प्रतिकूल प्रभाव सभी पक्षों पर पड़ता है। अत: सभी से अपील की गई कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचना पर ध्यान न देते हुए आपसी सहयोग एवं विश्वास के साथ कार्य करें तथा औद्योगिक शांति बनाए रखें।
हाई लेवल कमेटी द्वारा आश्वस्त किया गया कि राज्य सरकार श्रमिकों एवं नियोजकों दोनों के हितों की रक्षा हेतु पूर्णत: प्रतिबद्ध है तथा किसी भी समस्या के समाधान के लिए प्रशासन तत्परता से कार्य करेगा। बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई तथा सभी उपस्थित संविदाकारों द्वारा शासन के निदेर्शों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया गया।
बैठक में जिला प्रशासन एवं विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के आउटसोर्सिंग एजेंसियों/संविदाकारों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
