Dainik Athah

भाजपा पर बढ़ रहा ‘त्यागी नेतृत्व’ को मजबूत करने का दबाव

केसी त्यागी के जनता दल यू से रालोद में जाने के बाद

अश्वनी त्यागी वर्तमान में विधान परिषद सदस्य

मुरादनगर से लगातार दूसरी बार भाजपा से विधायक हैं अजीत पाल त्यागी


अशोक ओझा
गाजियाबाद/ मेरठ।
अब तक शांत पड़ी भारतीय जनता पार्टी की ‘त्यागी’ राजनीति में आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसका कारण है पूर्व सांसद केसी त्यागी का जनता दल यू छोड़कर राष्टÑीय लोकदल में जाना। केसी त्यागी के रालोद का दामन थामने के बाद अब भाजपा नेतृत्व पर भी त्यागी समाज के नेताओं को आगे बढ़ाने का दबाव बन रहा है। यह पहली बार है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में त्यागी किसी भी जिले में अध्यक्ष नहीं है। जबकि पश्चिम की अधिकांश सीटों पर त्यागी समाज हार- जीत तय करता है।
बता दें कि केसी त्यागी गाजियाबाद (उस समय की हापुड़ लोकसभा) सीट से जनता दल के टिकट पर सांसद रह चुके हैं। इससे पूर्व भी वे यहां से चुनाव लड़ चुके थे। इतना ही नहीं समाजवादी पार्टी में वे राष्टÑीय महासचिव इसके बाद जनता दल यू में राष्टÑीय महासचिव के साथ ही मुख्य प्रवक्ता एवं संरक्षक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वे जदयू से ही राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं। बदली परिस्थितियों में उन्होंने जदयू की सदस्यता नहीं ली और केंद्रीय राज्यमंत्री एवं राष्टÑीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी के नेतृत्व में रालोद में शामिल हो गये। उनके साथ ही उनके पुत्र अमरीश त्यागी भी भाजपा छोड़कर रालोद के हो गये।
रालोद भी उत्तर प्रदेश एवं केंद्र सरकार में भाजपा का सहयोगी दल है। केसी त्यागी के रालोद में जाने से जहां रालोद कार्यकर्ताओं में उत्साह है, वहीं भाजपा पर भी अब दबाव बन रहा है कि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में त्यागी समाज को सम्मान दें।
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जाटों ने दबाव बनाया तो सबकुछ हासिल किया
यदि देखें तो जाट समाज ने भाजपा पर दबाव बनाया तो इस समाज को सबकुछ हासिल हुआ। जिलों में पदों के साथ ही मंत्री पद, क्षेत्रीय अध्यक्ष पद, प्रदेश संगठन में पदाधिकारी। त्यागी समाज के लोग कहते हैं कि त्यागी समाज दबाव नहीं बनाता जिसका उसे नुकसान भी होता है।
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त्यागी समाज की नाराजगी कैसे दूर करेगी भाजपा
यदि देखें तो एक एमएलसी अश्वनी त्यागी एवं एक विधायक त्यागी समाज से है। बावजूद इसके भाजपा ने पहली बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसी त्यागी को जिलाध्यक्ष भी नहीं बनाया। इसके साथ ही प्रदेश सरकार में किसी त्यागी को मंत्री पद भी नहीं दिया। इतना ही नहीं भाजपा ने बालेश्वर त्यागी के बाद किसी को प्रदेश सरकार में मंत्री पद भी नहीं दिया। इस कारण त्यागी समाज की नाराजगी दूर करना भाजपा के लिए बड़ा संकट है। बागपत जिले के त्यागी समाज के एक सम्मानित व्यक्ति जो संघ से भी जुड़े रहे हैं कहते हैं त्यागी समाज को भाजपा बंधुवा मानती है। कहीं पार्टी की यह सोच उसके लिए भविष्य में नुकसानदायक साबित न हो जाये। इसके साथ ही आरोप है कि त्यागी समाज को संगठन में भी खास तव्वजो नहीं दी गई है।

भाजपा में त्यागी समाज के चेहरे

अश्वनी त्यागी
यह भी बता दें कि इस समय भाजपा में त्यागी समाज में दो ही चेहरे हैं। एक विधान परिषद सदस्य अश्वनी त्यागी एवं दूसरे मुरादनगर से लगातार दूसरी बार विधायक अजीत पाल त्यागी। इनमें से अश्वनी त्यागी के विषय में बात करें तो वे भाजपा में पश्चिम में क्षेत्रीय अध्यक्ष तो रह ही चुके हैं साथ ही उत्तर प्रदेश भाजपा में भी महामंत्री समेत अन्य पदों पर रह चुके हैं। इस समय अश्वनी त्यागी विधान परिषद सदस्य हैं तथा उनका दावा मंत्री पद पर मजबूत है।

अजीत पाल त्यागी
अब यदि मुरादनगर विधायक अजीत पाल त्यागी के संबंध में बात करें तो वे भाजपा से लगातार दूसरी बार मुरादनगर सीट से विधायक है। वे अपने जीत का अंतर भी लगातार बढ़ा रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में अजीत पाल त्यागी करीब एक लाख मतों के अंतर से चुनाव जीतकर विधायक बनें। इससे पूर्व वे गाजियाबाद जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वे राजनीतिक परिवार से आते हैं। अजीत पाल त्यागी के पिता स्वर्गीय राजपाल त्यागी लगातार मुरादनगर से विधायक रहे और वे प्रदेश सरकार में कई बार मंत्री भी रहे हैं। यदि मुरादनगर समेत अन्य क्षेत्रों की बात करें तो कहा जाता है कि उन्होंने अपने पिता से मिली विरासत को संभालकर ही नहीं रखा, बल्कि उसका विस्तार भी किया है। जब भी चुनाव आते हैं पश्चिम में उनकी मांग भी बढ़ जाती है।
इसके साथ ही किठौर के पूर्व विधायक सत्यवीर त्यागी, भाजपा के प्रदेश मंत्री बसंत त्यागी, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी जो पेशे से पत्रकार रहे हैं के साथ ही अन्य नेता भी शामिल है। अब देखना यह होगा कि भाजपा त्यागी समाज की नाराजगी कैसे दूर करती है। यह सवाल भी बड़ा है कि क्या किसी त्यागी नेता को योगी मंत्रिमंडल में स्थान मिल पायेगा।


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