यूजीसी को लेकर शुरू हुई जंग कहीं भाजपा को न पड़ जाये भारी
जिला कमेटी में ‘ओबीसी’ को सर्वाधिक 15 स्थान
सामान्य की हिस्से आये मात्र 4 पद, एससी में वाल्मीकि दरकिनार, जाटव से कोटा पूरा
अशोक ओझा
गाजियाबाद। पूरे देश में यूजीसी के नये नियमों को लेकर चल रहा विवाद समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी बैकफुट पर नजर आ रही है तथा इस मुद्दे से बच भी रही है। लेकिन भाजपा के ही कार्यकर्ता और पदाधिकारी यूजीसी के मुद्दे पर अपनी ही पार्टी से खफा है। बावजूद इसके पिछले दिनों गठित की गई भाजपा की गाजियाबाद जिला कमेटी में ही एक प्रकार से यूजीसी लागू करते हुए अगड़ों को पीछे धकेल दिया गया। इनके हिस्से में 21 में से मात्र चार पद हिस्से में आये हैं।
बता दें कि देशभर में यूजीसी के नियमों का असर सीधे सीधे भाजपा पर हो रहा है। गाजियाबाद जिला कमेटी की बाद करें तो पूर्व में 21 में से तीन पद त्यागी समाज को दिये गये थे। इनमें त्यागी समाज के रामकुमार त्यागी, राकेश त्यागी एवं आशीष त्यागी शामिल थे। इसके साथ ही वैश्य समाज से खुद जिलाध्यक्ष दिनेश सिंहल, स्वदेश जैन, अजय गर्ग, ब्राह्मण समाज से नवेंद्र गौड़, साधना शर्मा, सुदेश भारद्वाज, राजपूत समाज से निशा सिंह एवं पवन सोम शामिल थे। दलित समाज के हिस्से में उस समय तीन पद थे जिनमें एक वाल्मीकि, एक जाटव एवं एक खटीक के हिस्से में आया था। ओबीसी समाज की बात करें तो उसमें चार जाट, तीन गुर्जर एवं एक जायसवाल शामिल थे।
पिछले दिनों घोषित की गई जिला कमेटी में 21 में से मात्र चार पद सामान्य के हिस्से में आये हैं। इसमें एक राजपूत, एक वैश्य, एक त्यागी शामिल है। इसके साथ ही पूरी कमेटी में वाल्मीकि एवं खटीक समाज को भी प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। खानापूर्ति करने के लिए एक ब्राह्मण को मीडिया प्रभारी एवं एक को आईटी का संयोजक बनाया गया है। ये दोनों ही पद 21 सदस्यीय कार्यकारिणी से अलग है।
इस प्रकार पूरी कमेटी में यूजीसी का असर साफ नजर आ रहा है। इस स्थिति को लेकर पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी स्पष्ट तौर पर नजर आ रही है, लेकिन अभी तक खुलकर कोई भी बोल नहीं रहा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कमेटी में महिला कोटे को भी पूरी तरह से भरा नहीं गया। अब देखते हैं आगे इसका क्या असर होगा।
