लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं को नोटिस भेजना नोटबंदी के बाद भाजपा सरकार का वोटबंदी अभियान हैं। भाजपा की नीयत तब भी ख़राब थी, अब भी ख़राब है।
अखिलेश यादव ने कहा कि पहले तो सिर्फ़ मुसलमानों को काग़ज़ के लिए परेशान किया जाता था, अब तो हिंदुओं को भी नोटिस पर नोटिस जा रहे हैं। कोई दावा कर रहा था कि हम ग़लत वोटों के पकड़े जाने पर उन लोगों को डिटेंशन सेंटर भेज देंगे तो क्या अब वो वोट के आधार पर नागरिकता तय करेंगे और लोगों को उनके खेत, ज़मीन, घर-मकान से बेदखल करेंगे?
अखिलेश यादव ने कहा कि जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन जी के परिजनों को नकार दिया गया तो आम लोगों का क्या, वो बेचारे तो लड़ भी नहीं पाएंगे, उल्टे वोटर कार्ड नहीं होने पर वो और उनके परिवार के बुजुर्ग और बच्चे अपने हक़-अधिकार, विरासत, जायदाद, जमा-पूंजी के ज़ब्त हो जाने के डर से हमेशा तनाव और चिंता में ही रहेंगे।
अखिलेश यादव ने कहा कि सच तो ये है कि भाजपा ने अपनी बेईमानी, धोखेबाज़ी और चाल-चरित्र के ऐतिहासिक पतन के कारण अपना जनाधार पूरी तरह खो दिया है। इसीलिए अब भाजपा को सिर्फ़ धांधली का ही भरोसा है। उसके तथाकथित पन्ना प्रमुख ख़ुद ही भाजपाइयों को देखकर मुँह फेर ले रहे हैं क्योंकि भाजपा के गोरखधंधे, गलत नीतियों, महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी की वजह से वो अपने गाँव, समाज, बिरादरी में मुँह दिखाने लायक नहीं बचे हैं।
उन्होंने कहा कि जनता कह रही है कि ये तो सीधी सी बात है कि आज जिन काग़ज़ों को दिखाकर वोटर के नाम, उम्र व अन्य विवरण को ठीक करने का दावा चुनाव आयोग कर रहा है, वही काग़ज़ तो पहले भी वोटर ने दिखाए थे, तब फिर गलती कैसे हुई और क्या गारंटी कि फिर नहीं होगी? इसका मतलब गलती चुनाव आयोग ने करी और वोट सही कराने के लिए, अपना सारा काम छोड़कर दौड़ना जनता को पड़ रहा है।
श्री यादव ने कहा दरअसल सीधी बात ये है कि ये पीडीए के वोट काटने का एक बहुत बड़ा षडयंत्र है, जिसमें अगर वोटर थोड़ा जागरूक हुआ तो अपना नाम जुड़वा लेगा नहीं तो नाम ठीक कराने में आ रहीं दिक़्क़तों के कारण पीछे हट जाएगा। पीडीए प्रहरियों और ईमानदार बीएलओ की वजह से भाजपा व उनके संगी-साथी अपनी चाल में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। पीडीए प्रहरी याद रखें। एक भी झूठा वोट न जुड़ने पाए। एक भी सही वोट न कटने पाए। एक भी सही वोट न घटने पाए।
