Dainik Athah

दिल्ली- मेरठ रोड ‘ज्यों ज्योें दवा की रोग बढ़ता गया’

आरआरटीएस का ध्यान केवल राजस्व बढ़ान पर

कदम कदम पर गड्ढे दे रहे दुर्घटनाआें को निमंत्रण

गाजियाबाद से मेरठ सीमा तक सड़क में बड़े बड़े गड्ढे

दुहाई तक का हिस्सा लोक निर्माण के हैंड ओवर हो चुका है


अथाह संवाददाता
गाजियाबाद/ मोदीनगर।
‘ज्यों ज्यों दवा की रोग बढ़ता गया’ यह कहावत आरआरटीएस एवं लोक निर्माण विभाग पर सही बैठती है। इस समय दिल्ली- मेरठ रोड (पुराना एनएच 58) की तरफ न तो आरआरटीएस प्रबंधन का कोई ध्यान है और न ही लोक निर्माण विभाग। इस स्थिति में गढ्ढों में हिचकौले लेना और जाम से जूझना इस मार्ग पर सफर करने वालों की नियति बन चुका है।
जिस समय रेपिड रेल का काम शुरू हुआ उस समय दिल्ली- मेरठ रोड को लोक निर्माण विभाग ने आरआरटीएस को सौंप दिया था। शर्त यह थी कि सड़क को बनाकर एवं चौड़ा करने के बाद आरआरटीएस लोक निर्माण विभाग को वापस करेगा। सड़क बनने के बाद से ही इसके ऊपर सवाल उठते रहे हैं। शायद ही कोई दिन हो जब पूरी सड़क बेहतर स्थिति में नजर आई हो। जबकि सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदार की जिम्मेदारी है कि वह सड़क को लगातार दुरुस्त करें।
इस समय स्थिति यह है कि सड़क पर शायद ही किसी एक किलो मीटर के क्षेत्र में बेहतर स्थिति में हो।

बड़े बड़े गड््ढों के चलते लगता है जाम
स्थिति यह है कि गाजियाबाद से मेरठ की तरफ जाते समय मोरटा चौकी से ठीक पहले वाले कट जो गुलधर रेलवे यार्ड की तरफ जाता है से ठीक पहले इतना बड़ा गड्ढा बना हुआ है कि प्रति दिन यहां पर जाम की स्थिति रहती है। इसका कारण यह है कि मात्र एक वाहन निकलने लायक स्थान ही बचा है। यहां पर अनके वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। ठीक यहीं स्थिति मेरठ से आते समय मोरटा से पहले वाले कट पर है। एक बार तो पुलिस को यहां पर बेरिकेड लगाने पड़े जिससे दुर्घटना न हो। बाद में गड्ढे को भरने का काम किया गया, लेकिन यहां फिर गडढ हो गया है तथा सड़क पर फैली रोड़ी के कारण दुर्घटना तो होती ही है साथ ही जाम भी लगता है।

मुरादनगर आरआरटीएस स्टेशन के नीचे गडढ्े ही गड्ढे
यदि देखा जाये तो मुरादनगर आरआरटीएस स्टेशन के नीचे सड़क में गड्ढे ही गड्ढे बन गये हैं। कुछ दिन पूर्व यहां पर काम चलाऊ सड़क ठीक की गई थी, लेकिन निर्माण सामग्री निम्न स्तर की होन के कारण यहां पर सड़क एक माह भी नहीं चल सकी। इसके बाद एसआरए कट से पहले, सीकरी कट के पास, मोदीनगर साऊथ स्टेशन से दस कदम पहले, कादराबाद समेत अनेक स्थानों पर स्थिति खराब है। इसकी तरफ देखने की फुर्सत न तो आरआरटीएस को है न ही लोक निर्माण विभाग को।

आरआरटीएस के पास नहीं होता जवाब

यदि किसी मुद्दे पर आरआरटीएस पीआरओ से बात की जाये तो पहले तो उनका फोन नहीं उठता और यदि उठ जाये तो कहा जाता है कि संबंधित से बात कर दो दिन में बतायेंगे। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता का फोन तो उठता है, लेकिन उन्हें फोन मिलाया गया तो उनका फोन नहीं उठा। अब इस मामले को जिलाधिकारी को देखना चाहिये।

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