अथाह ब्यूरो
लख्खनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा और उनके संगी-साथी स्वदेशी करते-करते परदेसी हो गये क्या? कहाँ तो चीन से आयात का विरोध कर रहे थे, यहाँ तो साक्षात स्वागत कर रहे हैं। लगता है भाजपा के वैचारिक उस्ताद पड़ोसी देश से एकदलीय व्यवस्था का मास्टर क्लास ले रहे हैं। मिलनेवालों को मालूम है क्या कि वो भारत आकर जिससे मिल रहे हैं, उनका कागजों पर कोई अता-पता नहीं है, वो अनरजिस्टर्ड लोग हैं। उनका कहीं कोई पंजीयन नहीं है।
अखिलेश यादव ने कहा कि आज बात मुलाकात तक पहुँच गयी, इसका मतलब तैयारी कई सालों से चल रही थी, फिर ये बहिष्कार का ड्रामा क्या भाजपाई अपने समर्थकों की आँख में धूल झोंकने के लिए कर रहे थे? भाजपा के उन बेचारे समर्थकों के चेहरे आज कोई जाकर देखे जो चीनी सामान के बहिष्कार के लिए दरवाजे खटखटाते घूम रहे थे। बेचारे आज बहुत ठगा सा महसूस कर रहे हैं और आपस में व्हाट्सएप मैसेज करके कह रहे हैं, सुना तो था कि भाजापा किसी की सगी नहीं है पर हमको ही धोखा दे दिया, ये अच्छा नहीं किया। अब उनको अपने वैचारिक पूर्वजों की तरह भूमिगत होना पड़ेगा। ये समर्थक ह्यरंगे सियारह्ण की उस कहानी को भूल गये थे, जिसका राज एक दिन पानी बरसने पर खुल जाता है।
