कई व्हाट्सएप ग्रुपों में यह पोस्ट पढ़ने को मिली कि केसी त्यागी को जेडीयू से निकाल दिया गया है। सबसे पहले तो मैं उन लोगो से यह सवाल करना चाहता हूं क्या केसी त्यागी अब इतने छोटे नेता हो गए हैं कि उन्हें किसी पार्टी से यूँ ही निकाल दिया जाएगा। कोई भी पार्टी ऐसे नेता को निकालने से पहले सौ बार सोचती है कि वह क्या खोने जा रही है।
अब मैं आप सभी के सामने कुछ बातें रखना चाहता हूं। क्या आप सच में समझते हैं कि केसी त्यागी को यह नहीं पता कि उनके बयानों का उनके राजनीतिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?। क्या आपको लगता है कि वे इतने अनुभवहीन हैं कि बिना सोचे-समझे बयान देते हैं?।
कुछ दिन पहले उन्होंने स्वयं जनता दल यू के अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अनुरोध किया था कि वे अब पार्टी प्रवक्ता नहीं बनना चाहते, क्योंकि आजकल टीवी डिबेट का स्तर जगजाहिर है — वहाँ किस तरह के शब्दों का प्रयोग होता है और किस असभ्य तरीके से बहस होती है, यह सभी जानते हैं। आज किसी भी पार्टी के प्रवक्ता में इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह टीवी पर अपने मन की बात कह सके, यदि वह पार्टी की लाइन के विरुद्ध हो। केसी त्यागी को उन साहसी और निर्भीक नेताओं में मानता हूँ जिन्होंने कभी भी अपने जमीर और अपनी विचारधारा पर पार्टी की विचारधारा को हावी नहीं होने दिया।
इस देश में समय-समय पर ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने किसान और मजदूरों की आवाज उठाई, चाहे वह उनकी पार्टी की लाइन के विरुद्ध ही क्यों न रही हो। चौधरी चरण सिंह जब कांग्रेस में थे, तब भी उन्होंने किसानों की आवाज बुलंद की— भले ही वह कांग्रेस नेतृत्व को पसंद न आई। नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए वहीं किया जो उन्हें सही लगा, भले ही उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उनसे नाराज भी हुए। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने भी अपनी विचारधारा के अनुसार आवाज उठाई, चाहे वह कांग्रेस के विरुद्ध ही क्यों न रही हो। आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी भी कई बार वही कहते हैं जो उन्हें सही लगता है — भले ही पार्टी असहज हो जाए।
केसी त्यागी की राजनीति की पाठशाला के गुरु लोकनायक जयप्रकाश नारायण थे। उसी पाठशाला से मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, शरद यादव जैसे अनेक समाजवादी नेता निकले। कई नेताओं ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए अपनी मूल विचारधारा से समझौता किया, लेकिन केसी त्यागी जी ने कभी नहीं किया। उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा था कि बाबू जयप्रकाश नारायण के समाजवादी आंदोलन के सच्चे उत्तराधिकारी और कुशल प्रशासक नेता नीतीश कुमार हैं और उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए। यह उनकी निजी राय थी — और राय रखने का अधिकार हर नागरिक को है।
फिर भी जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन के बयान में कहीं यह नहीं कहा गया कि केसी त्यागी को पार्टी से निकाल दिया गया है। आज भी उन्हें पार्टी में पूरा सम्मान प्राप्त है। अगर पार्टी ऐसी गलती करती भी है तो वो एक एस नेता को खो देंगे जो पार्टी की राष्ट्रीय स्तर की राजनीति पर सही समय पर सही सलाह देते है और पूर्व में दिए गए सुझावों से पार्टी की मजबूती मिली है
मैं एक प्रशंसक होने के नाते केसी त्यागी जी से यही अनुरोध करता हूँ — आप आगे भी वही बोलते रहिए जो आपको सही लगता है। आप आज इन पार्टियों से बहुत ऊपर हैं। आपने अपने राजनीतिक जीवन में वह सम्मान कमाया है जो हर किसी को नसीब नहीं होता।
