Dainik Athah

लोग ‘उत्तराखण्ड की बेटी’ के लिए सड़कों पर न्याय माँग रहे हैं: अखिलेश यादव

भाजपाई डबल इंजन के उत्तराखण्ड में


अथाह ब्यूरो
लखनऊ।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा को आँख बंद करके समर्थन व वोट देनेवाले अगर रत्ती भर भी देश प्रेम, संवेदना, शर्म, मानवता, विवेक, ज्ञान और चेतना रखते हों तो निम्नलिखित को पढ़कर खुद से सवाल करें और अपनी बहन, बेटियों, परिवार की ओर देखने के बाद आइने में अपनी आँखों से आँखें मिलाएं:
उन्होंने कहा भाजपाई डबल इंजन के उत्तराखण्ड में लोग ‘उत्तराखण्ड की बेटी’ के लिए सड़कों पर न्याय माँग रहे हैं। उत्तर प्रदेश में जहरीले सिरप से लोगों की मौत हो रही है। जीएसटी अधिकारी के घर से करोड़ों नकद निकल रहे हैं और सरकार नोटबंदी से कालेधन के खात्मे और जीएसटी से ईमानदार टैक्स सिस्टम आने की दुहाई दे रही है। मध्य प्रदेश में जहरीले पानी से लोग मारे जा रहे हैं। मध्य प्रदेश में बाबासाहेब की तस्वीरें जलाई जा रही हैं, दलितों पर अत्याचार की हदें पार करी जा रही हैं। दिल्ली में लोग एक-एक साँस के लिए तरस रहे हैं। राजस्थान में किसान घातक फैक्टरियों की बाउंड्रीवाल ट्रैक्टर से तोड़ रहे हैं। भाजपाई डबल इंजन के गुजरात-हरियाणा में आम जनता अरावली को बचाने के लिए अवैध खनन माफियाओं और जमीन पर गिद्ध निगाह लगाए भाजपाइयों के विरुध्द केवल न्यायालय के सहारे है।
यादव ने कहा भाजपाई सवा इंजन के बिहार में शराब बंदी के बावजूद सीमांत थानों के महाभ्रष्टाचार से अवैध शराब धड्डले से बिक रही है। और बिहार की बहन-बेटियों के बारे में अपशब्द कहनेवाले डबल इंजन के उत्तराखंड के खिलाफ कोई इंजन नहीं बोल रहा है। कुछ और न समझ आए तो लोग हर काम में हो रहे महाघोटाले, भ्रष्टाचार; अपने घटते काम-कारोबार, व्यापार, दुकानदारी; अपने घरों के बेरोजगारों की हताशा; आसपास के जहरीले पर्यावरण व नफरती-हिंसक सामाजिक वातावरण व साम्प्रदायिक उन्माद; महिलाओं और पीडीए समाज के खिलाफ ़ बेतहाशा हो रहे अत्याचारों संघर्षरत किसान-मजदूरों, गरीबों के बारे में भी सोचें और फिर भाजपा को दिये जा रहे अपने समर्थन और वोट के बारे में भी और एक बार साम्प्रदायिकता का चश्मा उतारकर अपने घर-परिवार के भविष्य के बारे में भी और दुनिया में भारत की बिगड़ती छवि और उससे होनेवाली निवेश की हानि और विदेशों में देश की घटनाओं की प्रतिक्रिया, अपमान व देश से बाहर जाने की धमकी झेल रहे अपने भारतीय भाई-बहनों के बारे में भी सोचें। और कुछ नहीं कहना है।


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