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नोएडा लघु फिल्म फेस्टिवल का हुआ समापन: आज बन रही अधिकांश फिल्में भाषाओं और संस्कृतियों के बीच की खाई को बढ़ा रही है: प्रो. जेएस राजपूत

देश के कोने कोने में छिपी प्रतिभाओं को हमने आगे लाना है: आलोक कुमार

अथाह संवाददाता
नोएडा।
ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया विश्वविद्यालय में चल रहे ग्रेटर नोएडा लघु फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिवस में छात्र छात्राओं के साथ तीन मास्टर क्लास का आयोजन किया गया साथ ही समांतर फिल्म की स्क्रीनिंग भी की गई।
कार्यक्रम में पद्मश्री प्रोफेसर जे.एस. राजपूत ने अपने संबोधन में वर्तमान फिल्मों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज बन रही अधिकांश फिल्में भाषाओं और संस्कृतियों के बीच की खाई को बढ़ा रही हैं। इस दौरान उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए रवींद्रनाथ टैगोर, रतनजी टाटा और गांधीजी जैसी प्रसिद्ध हस्तियों को भी उद्धृत किया। मशहूर फिल्म निर्देशक एवं स्क्रीन राइटर आकाश आदित्य लामा ने छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में आने वाले तमाम उतार चढ़ाव से कैसे खुद को मजबूत करते हुए आगे बढ़ना है। साथ ही सिनेमा के क्षेत्र में दिन प्रतिदिन हो रहे वह बदलाव जो सामाजिक समरसता पर बल देते हैं उनके प्रति जागरुक रहने की आवश्यकता पर जोर दिया । लामा ने मास्टर क्लास को संबोधित करते हुए बताया कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमेशा गुणी और योग्य व्यक्ति का साथ रखना चाहिए जिससे कि आत्मविश्वास हमेशा बना रहे।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित लोकप्रिय अभिनेत्री सुप्रिया शुक्ला ने मास्टर क्लास के मुख्य विषय स्क्रिप्ट राइटिंग पर बात करते हुए बताया कि हमें पहले विषय के बारे में गहन अध्ययन और चिन्तन कर लेना चाहिए जिससे आपकी लिखी गई स्क्रिप्ट समाज में संदेश देने में सफल हो सके। जाने माने अभिनेता एवं राजनीतिज्ञ मनोज तिवारी ने मीडिया के विद्यार्थियों के समक्ष अपनी मास्टर क्लास में मुखरता से बात रखी और कहा की सिनेमा हमारे समाज का दर्पण होता है इसलिए हमें सिनेमा में ऐसी फिल्मों पर जोर देना चाहिए जो समाज को मार्गदर्शन दें। भारतीय सिनेमा की विशेषता यह है कि वह गांव-देहात के क्षेत्रों को प्रमोट करता है वहां की पारम्परिक सभ्यता से बेहद खूबसूरती के साथ लोगों को जोड़ता है । आज विश्व पटल पर भी भारतीय सिनेमा गौरवपूर्ण तरीके से आगे बढ़ा रहा है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख आलोक कुमार ने भारतीय संस्कृति के मनोरंजन भाव के उदाहरण देते हुए कहा कि आज भारत के 90 करोड़ उपयोग करते हैं, यह हमारी ताकत है, देश के कोने कोने में छिपी प्रतिभाओं को हमने आगे लाना है, इसके माध्यम से बड़ा परिवर्तन संभव है और उसमें सभी की भागीदारी हो सकती है।
इस दो दिवसीय लघु फिल्म फेस्टिवल के समापन अवसर पर फिल्म लेखक और निर्देशक आकाश आदित्य लांबा, जानी मानी अभिनेत्री सुप्रिया शुक्ला, संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपा शंकर, क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम सिंह, गलगोटिया यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार नितिन गौड़, कुलाधिपति की सलाहकार रेनू लूथरा और अन्य गणमान्य जन उपस्थित रहे।


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