भाजपा के राष्टÑीय अध्यक्ष नितिन नबीन का मेरठ का कार्यक्रम निरस्त!
पहले प्रदेशस्तर से बनेंगे जिलों के प्रभारी, इसके बाद क्षेत्रीय कमेटी के पदाधिकारियों को आवंटित होगे जिले
कई क्षेत्रों में शुरू हो चुकी है प्रक्रिया, प्रभारियों से तय होगा अनेक नेताओ का भविष्य
अशोक ओझा
ेमेरठ/ गाजियाबाद। भारतीय जनता पार्टी में प्रदेश एवं क्षेत्रों की टीमों की घोषणा के बाद अब सभी की नजरें प्रदेश एवं क्षेत्र से नियुक्त होने वाले जिला प्रभारियों पर लगी है। प्रभारी तय होने के बाद ही अनेक ऐसे नेताओं की राजनीति पर निर्णय होगा जो भाजपा की राजनीति में आगे बढ़ना चाहते हैं।
बता दें कि भारतीय जनता पार्टी में लंबे समय से प्रदेश स्तर से प्रभारियों में बदलाव नहीं हुआ है। अब चूंकि प्रदेश कमेटी में अधिकांश पदाधिकारी नये हैं इस लिहाज से जिलों के प्रभारी भी बदले जाने हैं, पार्टी क्षेत्रों के प्रभारियों में पहले ही बदलाव कर चुकी है। इसके साथ ही क्षेत्र स्तर से भी जिलों एवं मोर्चों के प्रभारी बनाये जाने हैं। अब से पहले यह माना जा रहा था कि भाजपा के राष्टÑीय अध्यक्ष नितिन नबीन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 12 एवं 13 सितंबर को प्रस्तावित दौरे के बाद ही प्रभारियों की तैनाती की जायेगी। सूत्र बताते हैं कि नितिन नबीन का राष्टÑीय स्तर पर दिल्ली में बड़ा कार्यक्रम होने के कारण उनका दौरा करीब करीब निरस्त हो गया हैं। इस स्थिति में प्रभारियों की तैनाती भी जल्द होने की संभावना है।
भाजपा सूत्रों की मानें तो प्रदेश कमेटी के अनेक नेताओं की नजरें पश्चिमी उत्तर प्रदेश और खासकर दिल्ली एनसीआर के जिलों पर लगी है। इनमें भी गाजियाबाद, गौतबुद्धनगर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़ के साथ ही अन्य जिलों पर है। पश्चिम के जिलों में प्रभारियों का विशेष रूप से ध्यान रखने की परंपरा है। इसी कारण न जिलों पर प्रदेश कमेटी के नेताओं की विशेष नजर है।
प्रदेश कमेटी के बाद क्षेत्रीय कमेटी के पदाधिकारियों की भी इन जिलों पर विशेष नजर है, जबकि कुछ की नजरें मोर्चों पर लगी है। यदि सूत्रों पर भरोसा करें तो इन जिलों का प्रभार हासिल करने के लिए कुछ ने तो अपने स्तर पर विशेष प्रयास करने शुरू कर दिये हैं।
बाक्स
चुनावी कार्यकाल में कौन छोड़ना चाहेगा मलाई वाले जिले
भाजपा सूत्रों के अनुसार प्रदेश एवं क्षेत्रीय कमेटी के इस कार्यकाल में लगातार चुनाव होने हैं। विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव जिसमें ब्लाक प्रमुख एवं जिला पंचायत अध्यक्ष भी शामिल है। इसके बाद नगर पालिका एवं नगर निगम के चुनाव होने हैं। इन चुनावों के मद्देनजर जिलों के प्रभारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। ऐसे में भी कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहता। प्रभारियों की मुहर लगने के बाद ही प्रत्याशियों की सूची को भी अंतिम रूप दिया जायेगा।
