Dainik Athah

कोर्ट मैनेजर्स के लिए नई नियमावली को कैबिनेट मंजूरी

कोर्ट मैनेजमेंट को मजबूत करने की योगी सरकार की बड़ी पहल


अथाह ब्यूरो
लखनऊ।
न्यायालयों के प्रशासनिक एवं प्रबंधकीय ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में योगी सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में इलाहाबाद हाईकोर्ट और प्रदेश के जनपदीय न्यायालयों में कार्यरत कोर्ट मैनेजर्स की सेवा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए ‘द इलाहाबाद हाईकोर्ट (कोर्ट मैनेजर्स सेंट्रलाइज्ड सर्विस) रूल्स, 2026’ के मसौदे को मंजूरी दे दी है।
सरकार के इस निर्णय से प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में कोर्ट मैनेजर्स को एक अधिक सुसंगठित, स्पष्ट और संस्थागत सेवा ढांचा मिल सकेगा। इससे न्यायालयों के प्रशासनिक कामकाज को गति देने और न्यायिक संस्थानों के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह नियमावली सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 16 मई, 2025 को कोर्ट मैनेजर्स के संबंध में दिए गए निदेर्शों के अनुपालन में तैयार की गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निदेर्शों एवं निष्कर्षों के आधार पर नियमावली का मसौदा तैयार कर राज्य सरकार को उपलब्ध कराया गया था, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान कर दी है।

81 कोर्ट मैनेजर्स की होगी तैनाती, वेतनमान निर्धारित
नई व्यवस्था के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट तथा प्रदेश के जनपदीय न्यायालयों में कुल 81 कोर्ट मैनेजर्स की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही उनके वेतन एवं सेवा संबंधी ढांचे को भी पुनरीक्षित किया गया है। कोर्ट मैनेजर्स का वेतनमान 56,100 से 1,77,500 तक निर्धारित किया गया है।

प्रशासनिक कामकाज को मिलेगा पेशेवर स्वरूप
कोर्ट मैनेजर्स न्यायालयों के प्रशासनिक और प्रबंधकीय कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इनके माध्यम से न्यायालयों में मानव संसाधन, आधारभूत सुविधाओं, केस-फ्लो मैनेजमेंट, प्रशासनिक समन्वय और अन्य प्रबंधकीय कार्यों की निगरानी एवं बेहतर संचालन में सहायता मिलेगी। इससे न्यायिक अधिकारियों और न्यायाधीशों को प्रशासनिक दायित्वों के भार में राहत मिलेगी।

न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम
योगी सरकार का यह निर्णय प्रदेश में न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ कोर्ट मैनेजमेंट को अधिक आधुनिक व परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सेवा नियम स्पष्ट होने से कोर्ट मैनेजर्स की जिम्मेदारियों और सेवा शर्तों में भी एकरूपता आएगी। सरकार के इस फैसले से न केवल सर्वोच्च न्यायालय के निदेर्शों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित होगा, बल्कि हाईकोर्ट और जिला न्यायालयों के प्रशासनिक कामकाज में भी बेहतर समन्वय और दक्षता आने की उम्मीद है। इसका प्रत्यक्ष लाभ न्यायालयों में आने वाले वादकारियों और आम नागरिकों को भी मिल सकेगा।

नई नियमावली लागू करने से राज्य सरकार पर लगभग 3.97 करोड़ रुपये का वार्षिक अतिरिक्त व्यय भार आने का अनुमान है। सरकार द्वारा इस वित्तीय भार को स्वीकार करते हुए कोर्ट मैनेजर व्यवस्था को संस्थागत रूप देने का निर्णय न्यायालयों के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दशार्ता है।

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