जयंत चौधरी को चवन्नी बता कर फंसे अखिलेश यादव
जाटों में उबाल से पश्चिम की राह कठिन हो सकती है अखिलेश की
3 को सहारनपुर के रामपुर मनिहारन में जयंत का पहला गुर्जर सम्मेलन
अशोक ओझा,
नयी दिल्ली । राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को चवन्नी से रुपया बनाने वाले बयान पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव फंसते नजर आ रहे हैं। इस मुद्दे पर जहां जाटों में उबाल है, वहीं जयंत चौधरी की जाट – गुर्जर गठजोड़ की रणनीति से अखिलेश यादव का हस्तिनापुर (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) जीतने के अरमानों पर पानी फिर सकता है।
बता दें कि पिछले दिनों सपा मुखिया अखिलेश यादव ने रालोद मुखिया जयंत चौधरी के संबंध में बगैर नाम लिये कहा था कि जिसे चवन्नी से रुपया बनाया वह गठबंधन छोड़ कर चला गया। इस बयान को जयंत पर हमला माना गया जिससे जाट समाज में रोष है।
इतना ही नहीं अखिलेश के बयान पर पलटवार करते हुए जयंत चौधरी ने कहा जाट समाज को टारगेट करना और कहना कि उनको एबीसीडी हमने सिखाई है। मैं इस अहंकार को करीब से देख चुका हूं। उनके साथ ही रालोद संसदीय दल के अध्यक्ष और पूर्व सांसद केसी त्यागी ने अखिलेश को घेरते हुए कहा कि मुलायम सिंह को मुलायम सिंह यादव बनाने वाले जयंत चौधरी के दादा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह थे। इनके साथ ही भाजपा के लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर भी सपा मुखिया पर हमलावर हुए।
अखिलेश यादव के बयान से जाट समाज में उबाल है और पार्टी के जाट नेता असहज है, वहीं दूसरी तरफ रालोद ने जाट – गुर्जर गठजोड़ की रूपरेखा तय कर दी है। जाट पहले ही रालोद- भाजपा के साथ है तो गुर्जर वोटों को सहेजने में जयंत जुट गए हैं। पिछले दिनों दिल्ली में देशभर के गुर्जर नेताओं की बैठक जयंत चौधरी और केसी त्यागी ने की।
बता दें कि गुर्जर समाज के बड़े चेहरे रहे स्व रामचंद्र विकल की पौत्री रमा नागर जहां रालोद में है तो दूसरी तरफ प्रदेश के उप मुख्यमंत्री रहे बड़े गुर्जर नेता चौधरी नारायण सिंह के पोते चंदन चौहान रालोद के बिजनौर से सांसद हैं। मदन भैया खतौली से विधायक है। नयी रणनीति के अनुसार जयंत चौधरी तीन सितम्बर को सहारनपुर के रामपुर मनिहारन में गुर्जर समाज की जनसभा करेंगे। इसके बाद अन्य क्षेत्रों में जनसभाएं की जाएगी। सहारनपुर में ही सितंबर के पहले सप्ताह के अंत में अखिलेश यादव की जनसभा भी होनी है।
अब जयंत चौधरी जाट गुर्जर समीकरण लेकर चल रहे हैं जिसका लाभ सीधे सीधे भाजपा और राजग को होगा। इस समीकरणके चलते भाजपा के पउप्र और रालोद के हस्तिनापुर को जीतना अखिलेश यादव के लिए आसान नहीं होगा।
