भाजपा नेताओं की बढ़ी धड़कन
क्षेत्रीय टीमों में स्थान पाने को भाग दौड़ शुरू
प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह दो दिन से सूची के साथ दिल्ली में मौजूद
राष्टÑीय नेतृत्व से हरी झंडी मिलने के बाद कभी भी घोषित हो सकती है सूची
अशोक ओझा
लखनऊ/ मेरठ। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश के उन नेताओं की धड़कनें अब बढ़ गई है जो पार्टी की क्षेत्रीय टीमों में आने का मंसूबा पाले हुए हैं। क्षेत्रीय टीमों की घोषणा दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद कभी भी घोषित हो सकती है।
बता दें कि भाजपा की टीम पंकज चौधरी की घोषणा के बाद अब भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं की नजर क्षेत्रीय टीमों की घोषणा पर है। जिन नेताओं को प्रदेश टीम में स्थान नहीं मिला तथा जो पहले से ही क्षेत्रीय टीमों का हिस्सा है ऐसे नेता टीम का हिस्सा बनने के लिए खासे व्याकुल है। ऐसे में सूची में नाम शामिल करवाने के लिए क्षेत्रीय क्षत्रप हर जतन कर रहे हैं।
भाजपा सूत्र बताते हैं कि क्षेत्रीय टीमों की सूची के साथ प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह दिल्ली में मौजूद है। इस सूची पर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की सहमति तो है, लेकिन राष्टÑीय महामंत्री बीएल संतोष की मुहर लगने के बाद यह सूची राष्टÑीय महामंत्री एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े के पास पहुंचने के बाद ही घोष्ति हो सकती है। अब राष्टÑीय नेतृत्व पिछले दो दिन से राष्टÑीय पदाधिकारी बैठक में व्यस्त है इस कारण उम्मीद जताई जा रही है कि अगले दो तीन दिन में सूची पर तावड़े की मुहर लग जाये।
यहीं कारण है कि जब से विनोद तावड़े राष्टÑीय महामंत्री के साथ ही उत्तर प्रदेश के प्रभारी बनें है उनके निवास पर क्षेत्रीय पदाधिकारी बनने वालों की भीड़ लगी हुई है। लेकिन हालात यह है कि भीड़ में नेता अथवा कार्यकर्ता केवल बायोडाटा देकर संतुष्ट हो जाते हैं।
क्षेत्रीय टीमों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है
भाजपा सूत्रों के अनुसार इस बार क्षेत्रीय टीमों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसका कारण यह है कि विनोद तावड़े क्षेत्रीय नेताओं के नामों पर लगातार मंथन कर रहे हैँ। पश्चिम क्षेत्र की टीम में सबसे अधिक बदलाव देखने को मिल सकता है। क्षेत्रीय टीमों में ऐसे कार्यकर्ताओं को स्थान दिया जा सकता है जो समर्पित होने के साथ ही बगैर किसी परेशानी के साथ संगठन के लिए समय दे सकते हों। इसमें उनका पिछला टैÑक रिकार्ड भी खंगाला जा रहा है।
सिफारिशों पर कितना होता है अमल
यह भी देखने वाली बात होगी कि क्षेत्रीय टीमों के लिए सिफारिश लगवाने वालों को कितना मौका मिलता है। विनोद तावड़े को जानने वालों का मानना है कि उनके लिए संगठन सर्वोपरि है ऐसे में वे कार्यकर्ता की क्षमता का आंकलन करने के बाद ही कोई निर्णय लेंगे। इसके साथ ही ऐसे कार्यकर्ता जिनके ऊपर पैसे का आरोप न हो।
बगैर क्षेत्रीय टीमों के दिखावटी अध्यक्ष बने हुए हैं

यदि देखा जाये तो क्षेत्रीय टीम घोषित होने की उम्मीद में क्षेत्रीय अध्यक्ष भी अब तक मात्र दिखावे के बने हुए हैं। क्षेत्रीय अध्यक्ष खासकर पश्चिम के नवाब सिंह नागर पुराने कार्यकर्ता होेने के बावजूद कोई असर अब तक नहीं दिखा सके हैं। नागर समेत सभी अध्यक्ष अभी तक भी स्वागत एवं बुके लेने तक ही सीमित होकर रह गये हैं।
