उत्तर प्रदेश प्रभारी बनाकर भाजपा ने विनोद तावड़े की संगठन क्षमता पर जताया भरोसा
भाजपा कार्यकर्ताओं को भी भरोसा, अब नहीं हो पायेगी उनकी उपेक्षा
संगठनात्मक चुनाव से पहले प्रदेश की थाह लेकर जा चुके हैं विनोद तावड़े
संगठन को बूथ तक मजबूत करना और गुटबाजी पर लगाम होगी नये प्रदेश प्रभारी के सामने चुनौती

अशोक ओझा
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व ने कुशल संगठक एवं चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बना चुके राष्टÑीय महामंत्री विनोद तावड़े के ऊपर फिर भरोसा जताते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है। उनके सामने संगठन को बूथ तक मजबूत करने के साथ ही गुटबाजी पर अंकुश लगाते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की चुनौती होगी।
विद्यार्थी परिषद की छात्र राजनीति से भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में उनकी भूमिका को इसी व्यापक संगठनात्मक क्षमता के विस्तार के तौर पर दिखाई देती है। देश के विभिन्न राज्यों के चुनावों और अभियानों में पार्टी ने उन्हें जो जिम्मेदारियां दीं। तावड़े को चुनावी रणनीति से आगे—संगठन को साथ लेकर चलने की कला का विशेषज्ञ माना जाता है। वे राष्टÑपति चुनाव से लेकर हरियाणा एवं बिहार राज्य में चुनाव के दौरान अपनी संगठन क्षमता एवं चुनावी रणनीतिकार के रूप में लोहा मनव चुके हैं। उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही संगठनात्मक चुनाव में भी वे जिम्मेदारी निभा चुके हैं, टीम पंकज चौधरी को तैयार करने में भी उनकी भूमिका किसी से छुपी नहीं है।
कड़े तेवर एवं सख्त संदेश के लिए भी जाना जाता है तावड़े को
विनोद तावड़े को कड़े तेवरों के साथ ही सख्त संदेश देने के लिए भी जाना जाता है। एक बार उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश का दौरा किया था, इस दौरान उन्होंने जो सख्त संदेश पार्टी पदाधिकारियों को दिया था उसे पार्टी कार्यकर्ता आज भी भूले नहीं है। उस समय से ही वे कार्यकर्ताओं की पसंद बन गये।
संगठन को बूथ स्तर तक ले जाना होगी चुनौती
यदि देखा जाये तो पूरे उत्तर प्रदेश में भाजपा का बूथ एवं शक्ति केंद्र स्तर का संगठन केवल कागजों में है। जमीनी स्तर पर संगठन की स्थिति शून्य की है। इस स्थिति में उनके सामने चुनौती होगी कि कैसे कार्यकर्ताओं में संगठन के प्रति लगाव उत्पन्न किया जाये जिससे कार्यकर्ता एक बार फिर खड़े हो सकें।
जिलों में गुटबाजी पर किस प्रकार रोेक लगा पायेंगे
विनोद तावड़े के सामने जिलों में गुटबाजी पर रोक लगा पाना भी चुनौती होगी। गुटबाजी पार्टी के दिग्गजों के साथ ही जिला पदाधिकारियों तक है। कई जिलों की स्थ्तिि तो ऐसी है कि जिला पदाधिकारी एवं मंडल अध्यक्ष तक बैठकों में नहीं पहुंचते। इस स्थिति में काम कैसे होगा यह भी उन्हें देखना होगा। यदि कहा जाये तो संगठन को मजबूती से खड़ा करना और गुटबाजों पर अंकुश उनके सामने कठिन चुनौती होगी। इसके साथ ही बाहर से आये नये लोगों को कैसे पार्टी की संस्कृति सिखायेंगे यह भी उन्हें देखना होगा। लेकिन जिस प्रकार उनकी छवि है उसे देखते हुए लगता है कि वे इन चुनौतियों से पार पा लेंगे।
