
अथाह संवाददाता,
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सभागार में सचिव विवेक कुमार मिश्र की अध्यक्षता में उन विद्यालयों, कोचिंग संस्थानों, प्ले-स्कूल एवं डे-केयर केन्द्रों के संचालकों के साथ बैठक आयोजित की गई, जिन्हें भवन मानकों व अन्य नियामकीय प्रावधानों के उल्लंघन के कारण प्राधिकरण द्वारा सील किया गया था। बैठक में प्रवर्तन अधिकारी, मुख्य अभियंता और मुख्य अग्निशमन अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने सभी संचालकों को अग्नि सुरक्षा मानकों, अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया, आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपकरणों की स्थापना एवं अनुरक्षण तथा प्रचलित अग्नि सुरक्षा नियमों के अनुपालन के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु अग्नि सुरक्षा मानकों का पूर्ण अनुपालन अनिवार्य है।संचालकों की दलीलों पर विचार के बाद प्राधिकरण ने विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित को देखते हुए संबंधित संस्थानों को दो माह का समय देने का निर्णय लिया।
इस अवधि के भीतर प्रत्येक संस्थान को उत्तर प्रदेश मॉडल भवन उपविधि, 2025 के अनुरूप अपने भवन का मानचित्र/भवन स्वीकृत कराना होगा तथा अग्निशमन विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) और अन्य वैधानिक औपचारिकताएँ पूरी करनी होंगी।प्राधिकरण ने यह भी कहा कि प्रत्येक संस्थान के प्रबंधक/संचालक प्राधिकरण के पक्ष में शपथ-पत्र (Affidavit) प्रस्तुत करेंगे, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि वे निर्धारित दो माह के भीतर समस्त वैधानिक औपचारिकताओं का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे। जिन संस्थानों का भवन प्रचलित नियमों एवं उत्तर प्रदेश मॉडल भवन उपविधि, 2025 के अनुरूप स्वीकृत कराना संभव नहीं होगा, उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर अपने परिसरों में संचालित गतिविधियाँ पूर्णतः बंद कर देनी होंगी अथवा किसी विधिवत स्वीकृत भवन/परिसर में स्थानांतरित होकर ही संचालन जारी रखना होगा।
बैठक में उपस्थित सभी विद्यालय एवं संस्थान संचालकों ने इन शर्तों पर सहमति व्यक्त की। प्राधिकरण ने निर्णय लिया कि शपथ-पत्र प्राप्त होने के बाद उनके सील किए गए परिसरों को अस्थायी तौर पर डी-सील किया जाएगा ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। उल्लेखनीय है कि यदि किसी संस्थान द्वारा निर्धारित दो माह के भीतर शर्तों एवं वैधानिक प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो प्राधिकरण नियमानुसार पुनः कठोर प्रवर्तनात्मक कार्रवाई करेगा।
