उत्तर प्रदेश निजी बिजनेस पार्क विकास योजना-2025 को योगी कैबिनेट की मंजूरी
विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले बिजनेस पार्क विकसित कर वैश्विक निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को दी जाएगी गति
वैश्विक निगमों के कार्यालय, आरएंडडी सेंटर, जीसीसी तथा आॅपरेशनल सेंटर किए जा सकेंगे स्थापित
प्रत्येक बिजनेस पार्क को 45 वर्षों के लिए किया जाएगा विकसित, प्रत्येक बिजनेस पार्क के लिए न्यूनतम 10 एकड़ भूमि का प्रावधान
अथाह ब्यूरो
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश निजी बिजनेस पार्क विकास योजना-2025’ को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना के तहत प्रदेश में विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले बिजनेस पार्क विकसित कर वैश्विक निवेश, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को नई गति दी जाएगी। योजना के अंतर्गत प्रदेश में ऐसे बिजनेस पार्क विकसित किए जाएंगे, जहां वैश्विक निगमों के कार्यालय, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) केंद्र, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) तथा संचालन केंद्र स्थापित किए जा सकेंगे। इन पार्कों में रेडी-टू-आॅपरेट और प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे सेवा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में तेजी से विस्तार होगा।
रेडी-टू-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर से घटेगी लागत और समय
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने बताया कि अभी तैयार इंफ्रास्ट्रक्चकर के अभाव में परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि होती है। यह योजना इस समस्या का समाधान करते हुए आधुनिक व रेडी-टू-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएगी, जो प्रदेश की औद्योगिक निवेश नीतियों का पूरक बनेगा। विश्वस्तरीय बिजनेस पार्क्स की स्थापना से औद्योगिक सेटअप में तेजी आएगी, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा, हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे, राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और स्टार्टअप को समर्थन मिलेगा और औद्योगिक क्लस्टरिंग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही साझा जोखिम (रिस्क शेयरिंग) मॉडल को प्रोत्साहन मिलेगा।
डीबीएफओटी मॉडल पर होगा विकास
योजना को डिजाइन, बिल्ट, फाइनेंस, आपरेट एवं ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मॉडल के तहत लागू किया जाएगा। इसके माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी और दक्षता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे परियोजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। प्रत्येक बिजनेस पार्क को 45 वर्षों की रियायत अवधि पर विकसित किया जाएगा, जिसे आगे 45 वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा। इसके बाद विकसित संपत्तियां राज्य सरकार को हस्तांतरित कर दी जाएंगी। प्रत्येक बिजनेस पार्क के लिए न्यूनतम 10 एकड़ भूमि का प्रावधान किया गया है। हालांकि, स्थान विशेष की उपलब्धता और उपयुक्तता के आधार पर इसमें लचीलापन भी रखा गया है। योजना की वित्तीय संरचना में अपफ्रंट लैंड प्रीमियम और राजस्व भागीदारी शामिल होगी।
निजी डेवलपर पर पूरी जिम्मेदारी
चयनित डेवलपर को योजना के तहत डीबीएफओटी की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी। रियायत अवधि के दौरान डेवलपर को परियोजना के सभी पहलुओं का प्रबंधन करना होगा। योजना लागू होने के बाद संबंधित औद्योगिक विकास प्राधिकरण या सरकारी भूमि स्वामित्व एजेंसियां आवेदन और बोली प्रक्रिया संचालित करेंगी। इसमें प्रस्ताव आमंत्रण, प्रारंभिक जांच और तकनीकी मूल्यांकन शामिल होगा। प्रस्तावों के मूल्यांकन के लिए एक स्क्रीनिंग समिति गठित की जाएगी, जो शॉर्टलिस्ट आवेदकों की सिफारिश आवंटन समिति को करेगी। अंतिम भूमि आवंटन का निर्णय संबंधित प्राधिकरण द्वारा लिया जाएगा।
नियमित प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य
विकासकर्ता को अर्धवार्षिक आधार पर प्रगति एवं वित्तीय रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें भौतिक प्रगति, व्यय का विवरण और समय-सीमा के अनुपालन की जानकारी शामिल होगी। यह रिपोर्ट नामित प्राधिकरण को सौंपी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत सभी निविदाएं राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) दिशा-निदेर्शों के अनुसार जारी की जाएंगी। प्रत्येक निविदा के लिए संबंधित प्राधिकरण को अपने प्रशासनिक विभाग से अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। यह योजना कैबिनेट से अनुमोदित होने के बाद अधिसूचना जारी होने की तिथि से प्रभावी होगी। इसके बाद प्रदेश की विभिन्न भूमि स्वामित्व एजेंसियां बिजनेस पार्क विकास के लिए इस नीति को अपनाएंगी।
बॉक्स
सम्भल में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर को मिली मंजूरी
कैबिनेट बैठक में अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत गंगा एक्सप्रेसवे के निकट जनपद सम्भल में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) की स्थापना हेतु अवस्थापना विकास कार्यों को मंजूरी दे दी गई है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के अंतर्गत 29 स्थलों पर प्रस्तावित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना के तहत यह क्लस्टर विकसित किया जाएगा, जिसमें सड़क, आरसीसी नालियां, कल्वर्ट, फायर स्टेशन, अवर जलाशय, जलापूर्ति लाइन, फेंसिंग, विद्युत सहित आधुनिक आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा। परियोजना का निर्माण ईपीसी मॉडल पर किया जाएगा तथा प्रस्तावित 293.59 करोड़ रुपये की लागत के सापेक्ष वित्त समिति द्वारा अनुमोदित 245.42 करोड़ रुपये की धनराशि पर कैबिनेट ने अंतिम स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना से सम्भल क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स सुविधाएं सुदृढ़ होंगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
