384 दिन का होगा यह नव वर्ष
रौद्र नामक संवत्सर में विश्व में मचेगी की तबाही
नव संवत्सर के राजा होंगे बृहस्पति और मंत्री होंगे मंगल
संवतसर 2083 में दो सूर्य ग्रहण होंगे, किंतु भारत में दिखाई नहीं देंगे।

शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र
गाजियाबाद। पंडित शिवकुमार शर्मा के अनुसारभारतीय नव संवत 2083 दिन बृहस्पतिवार 19 मार्च 2026 से आरंभ हो रहा है। हिंदू नव वर्ष के अलग-अलग नाम होते हैं और उसी नाम के अनुरूप संवत्सर का फल भी घटित होता है।संवत 2083 का नाम रौद्र है।“रौद्र” शब्द भगवान शिव के उग्र नाम रुद्र शब्द से बना है। इसका अर्थ है उग्र, तेजस्वी, संघर्षपूर्ण या कठोर प्रभाव वाला।रौद्र संवत्सर फल के विषय में ग्रंथों में कहा गया है
— रौद्रे संवत्सरे घोरा रोगभूपभयप्रदा।अनावृष्टिर्भवेत् किञ्चित् जनानां क्लेशकारिणी॥”
इसका भावार्थ यह है कि रौद्र नामक संवत्सर में रोगों की वृद्धि हो सकती है।शासकों अथवा प्रशासन से जनता को कष्ट हो सकता है।कहीं-कहीं वर्षा का अभाव या असंतुलन हो सकता है।सामान्य जनजीवन में कुछ तनाव , असंतोष या संघर्ष की स्थिति बनती है। सत्ता पक्ष द्वारा कठोर निर्णय से संघर्षपूर्ण स्थितियाँ बन सकती हैं।दो देशों के बीच तनाव या विवाद बढ़ने की संभावना तीव्र होती है। विश्व को पारस्परिक युद्ध, संघर्ष, अराजकता का सामना करना पड़ता है।भारतवर्ष में सत्ता पक्ष द्वारा प्रशासनिक सख्ती बढ़ सकती है।प्राकृतिक रूप में वर्षा का वितरण असमान हो सकता है।कहीं अधिक वर्षा, कहीं कमी, प्रचंड गर्मी,प्राकृतिक आपदाओं की आशंका कुछ अधिक मानी जाती है।“रौद्र” नाम केवल नकारात्मक ही नहीं है।ज्योतिष के अनुसार रौद्र नाम के संवत्सर में प्रजा का साहस और पराक्रम बढ़ता है।देश में नई तकनीक या वैज्ञानिक कार्यों में प्रगति हो सकती है।समाज में अन्याय के विरुद्ध आवाज़ भी मजबूत होती है।
नव संवत 2083 में ज्येष्ठ मास अधिक मास होगा अर्थात दो ज्येष्ठ मास होंगे। 2 में से 29 जून तक ज्येष्ठ मास रहेगा। इसमें अधिक मास ( पुरूषोत्तम मास) 17 मई से 15 जून तक रहेगा । अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस मास में विवाह ,गृह प्रवेश संबंधी शुभ कार्य का निषेध रहेगा। भगवान विष्णु की साधना, पूजा ,कीर्तन आदि के लिए यह बहुत ही अच्छा महीना होता है।इसलिए इस साल में 384 दिन होंगे।बृहस्पतिवार को नव संवत आरंभ होने से संवत के राजा बृहस्पति रहेंगे ।
राजा बृहस्पति होने का फल:
जिस वर्ष से बृहस्पति संवत्सर का राजा होता है उस वर्ष वर्षा अच्छी होती है। कृषि की पैदावार में वृद्धि होती है। भौतिक सुख सुविधाओं में बढ़ोतरी होने से जनता प्रसन्न रहती है। विश्व में आध्यात्मिक शक्तियों का बोलबाला होता है।संवत्सर 2083 की प्रथम संक्रांति मंगलवार को आएगी । इसलिए इस वर्ष का मंत्री का पद मंगल को मिला है।
वर्ष के मंत्री मंगल होने का प्रभाव
शास्त्रों के अनुसार वर्ष का मंत्री मंगल होने से समाज में असामाजिक तत्वों की भरमार रहेगी।अधिकारियों की अकर्मण्यता से भ्रष्टाचार का प्रभाव बढेगा।आतंकी, युद्ध आदि उपद्रव प्रजा में रोग , विषाद, महानगरों में अराजकता का बोलबाला होगा।
संवत्सर 2083 में दो सूर्य ग्रहण होंगे। 12 अगस्त 2026 एवं 6 फरवरी 27 को पड़ने वाले सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे ।इसलिए इनका कोई प्रभाव नहीं भारत में नहीं होगा ।

