Dainik Athah

आरोप कभी इतना बड़ा नहीं हो सकता कि वो सच को आच्छादित कर ले: अखिलेश यादव

केजरीवाल और एनसीईआरटी को लेकर सपा प्रमुख ने भाजपा पर बोला हमला

जैसे फँसाती है चोर को खाँसी वैसे गुनाहगार को झूठी माफी


अथाह ब्यूरो
लखनऊ।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ सत्य और न्याय दोनों खड़े हैं। आरोप कभी इतना बड़ा नहीं हो सकता कि वो सच को आच्छादित कर ले। आज हर ईमानदार आशा भरी साँस लेगा और भाजपा के समर्थक शर्म के मारे घोर आत्म-लज्जित हो रहे होंगे। भाजपा ने दिल्ली के निवासियों से विष्वासघात किया है।
यादव ने कहा कि जो कपटजीवी सनातनी शंकराचार्य, साधु, संतों, संन्यासियों तक पर झूठे आरोप लगाने का महापाप करते हैं, वो भला किसी सरकार, दल या किसी व्यक्ति को बदनाम करने के लिए किस हद तक जा सकते हैं, इसकी कल्पना कोई शरीफ आदमी कर ही नहीं सकता है।
अखिलेश यादव ने कहा कि आजादी से पहले, वर्तमान सत्ता के जो ह्यसंगी-साथीह्ण देश के दुश्मनों से मिले हुए थे और स्वतंत्रता सेनानियों को फाँसी के फंदों तक पहुँचाने के लिए, आजादी के दीवानों के खिलाफ मुखबिरी जिनका काम रहा है और जो देश को गुलाम बनानेवाले साम्राज्यवादियों के माफी-वजीफे पर रहकर अपनी भूमिगत भूमिका निभाते रहे हैं, छल-छलावे के वो विचारवंशी भाजपाई, आज किसी को मुँह दिखाने लायक नहीं बचे हैं। भाजपा के लिए ये समाचार किसी ‘नैतिक मृत्युदंड’ से कम नहीं है।
एक अन्य बयान में यादव ने कहा है कि जैसे फँसाती है चोर को खाँसी वैसे गुनाहगार को झूठी माफी। भाजपाई अपनी भ्रष्टाचारी सोच से पहले तो दूसरों पर अपने से कई गुने बड़े आरोप लगाते हैं (जिसका मूल उद्देश्य ये होता है कि दूसरों के महाकाय आरोपों के आगे उनके भ्रष्टाचार नगण्य लगें) लेकिन जब फँस जाते हैं तो ‘खेद’ प्रकट करते हैं। दिखावटी माफी आखिरकार पकड़ी ही जाती है, ऐसे धूर्त लोगों की झूठी मंशा और कपट का एक न एक दिन पदार्फाश होता ही है, जो इस बात का भंडाफोड़ कर देता है कि वो कसूरवार हैं, बेकसूर नहीं।
अखिलेश यादव ने कहा है कि ताजा मामले में एनसीईआरटी की किताब में इन भ्रष्ट भाजपाइयों ने माननीय न्यायापालिका तक पर भ्रष्ट होने के इल्जाम लगाए और जब उच्चतम न्यायालय से कड़ी आपत्ति हुई तो मासूम बनकर कह रहे हैं, हमें तो मालूम ही नहीं ये किसने किया। जनता पूछ रही है कि भाजपाई सरकार चला रहे हैं या मनमानी का सर्कस?


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