पण्डित तेजराम कालेज ऑफ एजुकेशन:
चौधरी चरणसिंह विश्व विद्यालय की नाक के नीचे चल रहा शैक्षणिक घोटाला;
अथाह संवाददाता,
गाजियाबाद। सिहानी सद्दीकनगर, आशाराम त्यागी मार्ग (भवन संख्या 505) पंडित तेजराम कालेज ऑफ एजुकेशन की असलियत बुधवार को उस समय उजागर हुई जब कालेज में आयोजित वायवा प्रैक्टिकल के बहाने परिसर में हलचल देखने को मिली। बाहरी दिखावे के बावजूद वास्तविकता हैरतअंगेज़ थी: न तो कोई स्थायी प्रधानाचार्य और न ही नियमित शिक्षक स्टाफ; छात्र बताते हैं कि वे केवल परीक्षा व प्रैक्टिकल के दिनों में ही कालेज आते हैं।
कालेज परिसर में मौजूद कुछ विद्यार्थियों से बातचीत में पता चला कि अधिकांश छात्र-छात्राएँ बिहार के दरभंगा जिले से हैं और उनका दाखिला किसी कंसल्टेंसी के जरिए करवाया गया था। छात्रों का कहना था कि उन्हें नियमित कक्षाओं में आने की जरूरत नहीं बल्कि अधिकांश छात्र केवल परीक्षा/प्रैक्टिकल के दिन ही पहुँचते हैं। ऐसे हालात में शैक्षणिक गुणवत्ता और डिग्री की वैधता पर चिंताएँ बढ़ना स्वाभाविक है।
मान्यता और संचालन पर सवाल
यह कालेज वर्ष 2002–03 में बीएड/बीटीसी संबंधित मान्यता प्राप्त करने का दावा करता है। सवाल उठता है कि किस आधार पर और कितने वर्षों तक यह संस्था बिना प्रधानाचार्य, बिना शिक्षण स्टाफ और बिना नियमित शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में रही।
स्थानीय सूत्रों और छात्रों के बयानों के अनुसार 100 सीटों के नाम पर फीस व छात्रवृत्ति के लेन-देन ने संदिग्ध व्यवहार को जन्म दिया है। कुछ मामलों में कालेज की आमदनी को ‘हाउस टैक्स’ व ‘जमीन’ जैसे जालसाजी भरे शीर्षकों के पीछे छुपाया गया। यदि यह दावे सत्य पाए गए तो बड़े पैमाने पर आर्थिक गोरखधंधा और दुरुपयोग के संकेत मिलते हैं।
यह कालेज चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय के अधीन है, इसलिए विश्वविद्यालय की निगरानी और नियमन संबंधी जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठते हैं। क्या विश्वविद्यालय व राज्य शिक्षा विभाग ने समय-समय पर स्थल निरीक्षण, मान्यता शर्तों का अनुपालन और वित्तीय ऑडिट किया। इसका स्पष्ट लेखा-जोखा सार्वजनिक होना चाहिए। यदि निरीक्षण न होने के कारण यह स्थिति बनी है तो नियामक खामियों की पहचान आवश्यक है।
छात्रों के बयान इस बात की पुष्टि करते हैं कि दाखिले कंसल्टेंसी के माध्यम से कराए गए थे, जिनसे कई बार प्रवेश प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव होता है। ऐसे प्रवेशों की वैधता, फीस रसीदों का सत्यापन और छात्रवृत्ति के भुगतान के दस्तावेजों की फॉरेंसिक जाँच की मांग उठती है। : जिला शिक्षा व राज्य शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त निरीक्षण और सत्यापन टीम का गठन हो।
चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय से पूछा जाए कि उसने मान्यता और संचालन की निगरानी कैसे की; पिछली निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक हों। वित्तीय ऑडिट: फीस, छात्रवृत्ति और भवन/जमीन लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट, कंसल्टेंसी द्वारा किए गए दाखिले, छात्र सूची और उनकी उपस्थिति-रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
पंडित तेजराम कालेज ऑफ एजुकेशन में बरती जा रही अनियमितता की उच्च स्तर से जांच के लिए एक पूर्व पार्षद ने प्रदेश व केंद्रीय शिक्षा मंत्री को शिकायती पत्र भेजा है।
