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पश्चिमी उप्र के प्रभारी राम प्रताप सिंह चौहान के सामने संगठन को पटरी पर लाने की चुनौती!

भाजपा के प्रभारियों की नियुक्ति के बाद संगठन में देखने को मिल सकता है बदलाव

गाजियाबाद जिला- महानगर, हापुड़ समेत कई जिलों की चुनौती होगी प्रदेश महामंत्री के सामने

पश्चिम में गुटबाजी से निपटना होगा उनके सामने कठिन चुनौती


अशोक ओझा
गाजियाबाद।
भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बदलाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए शनिवार को मोर्चो के साथ ही सभी क्षेत्रों के नये प्रभारियों की घोषणा कर दी। इसके साथ ही प्रदेश महामंत्री राम प्रताप सिंह चौहान को पश्चिम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके सामने पश्चिम के संगठन को पटरी पर लाने के साथ ही लंबे समय से बैठे मठाधीशों की गुटबाजी से निपटना बड़ी चुनौती होगी।
बता दें कि अब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी का दायित्व तत्कालीन प्रदेश महामंत्री सुभाष यदुवंश के पास थी, लेकिन उनका कार्यकाल निराशा भरा रहा। अब संघ से जुड़े राम प्रताप सिंह चौहान को सौंपी गई है। उन्हें अनुभवी माना जाता है। प्रदेश से प्रभारियों की जो सूची जारी हुई उसमें पहला नाम ही राम प्रताप सिंह चौहान का है। वे संगठन चुनाव के समय गाजियाबाद जिले के पर्यवेक्षक भी थे।

गाजियाबाद- हापुड़ समेत अनेक जिलों के संगठन को पटरी पर लाना कठिन
यदि देखा जाये तो गाजियाबाद जिला भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है। गाजियाबाद जिला संगठन में तो हालात यह है कि बैठकों तक में पदाधिकारी नहीं जाते। इसके साथ ही संगठन के पदाधिकारियों में सड़कों पर मारपीट शुरू हो गई है। विवादों के बाद एवं मोदीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एक जिला उपाध्यक्ष को प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा। वहीं, महानगर में अध्यक्ष के आगे किसी पदाधिकारी के बोल तक नहीं निकल पाते। महानगर अध्यक्ष की शायद ही किसी जनप्रतिनिधि से पटरी बैठ रही हो।

बूथ कमेटियां- शक्ति केंद्र कागजों में, धरातल पर शून्य
यदि बूथ कमेटियों एवं शक्ति केंद्रों की बात करें जो भाजपा की रीढ़ है तो पूरे पश्चिम में यह कागजों में ही है, धरातल पर इनकी स्थिति शून्य है। बैठकों में पार्टी के जिला पदाधिकारियों एवं मंडल अध्यक्षों की उपस्थिति चिंताजनक है। जबकि भाजपा की जीत का मुख्य कारण पार्टी का जमीनी संगठन है जो जमीन मेंं मिल गया है।

सभी जिलों में गुटबाजी और छत्रपों का वर्चस्व
यदि देखा जाये तो गाजियाबाद जिला, महानगर के साथ ही हापुड़ में गुटबाजी चरम पर है। पिछले दिनों हापुड़ चेयरमैन भाजपा में शामिल हुई। उनके ऊपर अनेक आरोप है, उनकी ज्वाइनिंग किसने करवाई यह बात सभी एक दूसरे से पूछ रहे हैं। वहीं मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत समेत सभी जिलों में संगठन, जन प्रतिनिधि, पूर्व जन प्रतिनिधि आमने सामने है। सहारनपुर में तो राघव लखनपाल और प्रदेश सरकार में मंत्री कुंवर ब्रजेश सिंह, मुजफ्फरनगर में संजीव बालियान की अन्य जनप्रतिनिधियों से पटरी नहीं बैठ रही। शामली, बागपत, मुरादाबाद आदि जिलों में भी स्थिति ठीक नहीं है।

सुभाष यदुवंश के कार्यकाल में नहीं था कोई सुध लेने वाला

यदि देखा जाये तो सुभाष यदुवंश के कार्यकाल में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संगठन को खासा नुकसान हुअ। वे केवल बड़े कार्यक्रमों में ही आते थे, संगठन की तरफ उनका कोई ध्यान नहीं था। इसके साथ ही सपा समर्थकों के साथ घूमने का आरोप भी कार्यकर्ता उनके ऊपर लगाते थे।

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