Dainik Athah

स्व. राजपाल त्यागी की कर्मभूमि से ‘त्यागी समाज’ को साधने की मुख्यमंत्री योगी की रणनीति

पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं लोकप्रिय नेता

मुरादनगर क्षेत्र रहा है स्व. राजपाल त्यागी की कर्मभूमि

छह बार राजपाल त्यागी रहे क्षेत्र से विधायक, तीन बार प्रदेश सरकार में मंत्री

लगातार दो बार से है राजपाल त्यागी के पुत्र अजीत पाल त्यागी मुरादनगर से विधायक


अशोक ओझा
गाजियाबाद।
मुरादनगर विधानसभा क्षेत्र पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. राजपाल त्यागी की कर्मभूमि रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि वे इस क्षेत्र से छह बार विधायक चुने गये, उनके बाद उनके कनिष्ठ पुत्र अजीत पाल त्यागी लगातार दो बार से मुरादनगर का विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अब मुख्यमंत्री मुरादनगर में राजपाल त्यागी की प्रतिमा का अनावरण कर आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर त्यागी समाज को साधने का काम भी करेंगे।
बता दें कि राजपाल त्यागी जब कांग्रेस में थे उस समय उनको टिकट न देकर किसी अन्य को दे दिय गया, लेकिन राजपाल त्यागी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और विजय प्राप्त की। इसके बाद वे फिर कांग्रेस में शामिल हो गये। 1991 का चुनाव वे राम लहर में कांग्रेस के टिकट पर लड़े और फिर से जीत हासिल की। उस समय देहरादून से लेकर आगरा तक वे अकेले जिन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की। 1996 का चुनाव उन्होंने सपा के टिकट पर लड़कर जीत हासिल की और प्रदेश सरकार में मंत्री बनें।
2002 में एक बार फिर वे कांंग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत का सेहरा बांधा। इसके बाद 2007 में उन्होंने फिर से निदर्लीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उस समय प्रदेश में मायावती के नेतृत्व में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी, मायावती के कहने पर उन्होंने विधायक पद से त्याग पत्र दिया और 2008 के उप चुनाव में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़कर छठी बार विधायक बनें और साथ ही कैबिनेट मंत्री। उनका सफर यह बताता है कि पार्टी कोई भी हो जीत राजपाल त्यागी के हिस्से में ही आई। उन्हें मुरादनगर के लोग सड़क मंत्री के नाम से भी पुकारते थे। उनके समय मुरादनगर क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछ गया था।
अब 2017 और 2022 में उनके पुत्र अजीत पाल त्यागी लगातार दो बार से भाजपा के टिकट पर विधायक है।

पिछले दिनों में भाजपा संगठन हो या सरकार उनमें त्यागी समाज का प्रतिनिधित्व न होने से त्यागी समाज में नाराजगी है। इस नाराजगी को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्व. राजपाल त्यागी की प्रतिमा के अनावरण कर एवं उनके पुत्र अजीत पाल को सहलाकर दूर करने का प्रयास करेंगे। अब जबकि भाजपा के सहयोगी रालोद ने पूर्व सांसद केसी त्यागी को पार्टी में शामिल कर एवं उन्हें संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया है तब से भाजपा भी त्यागी समाज की नाराजगी को दूर करने का प्रयास करेगी। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री त्यागी समाज को कैसे साधेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *