भाजपा के लिए धर्म नहीं बल्कि धन और वोट प्राथमिकता हैं: अखिलेश यादव
अथाह ब्यूरो
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ में ज्योतिषपीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज से शिष्टाचार भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान गौ संरक्षण, सनातन परंपराओं, सामाजिक सरोकारों तथा समसामयिक राष्ट्रीय विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इन दिनों पूज्य शंकराचार्य जी उत्तर प्रदेश में गौ संरक्षण, गौवंश के सम्मान तथा सनातन मूल्यों के प्रति जनजागरण के उद्देश्य से संचालित अपनी गविष्ठि (गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा के क्रम में विभिन्न जनपदों का भ्रमण कर रहे हैं। इस यात्रा के माध्यम से वे गौ संरक्षण को जनआंदोलन बनाने, गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित करने, गौहत्या पर प्रभावी रोक लगाने तथा गौ सेवा एवं सनातन परंपराओं के संरक्षण के लिए समाज में व्यापक जागरूकता का आह्वान कर रहे हैं। इसी क्रम में लखनऊ प्रवास के दौरान श्री अखिलेश यादव ने उनसे भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा गौ संरक्षण, सनातन परंपराओं और समसामयिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए यादव ने कहा कि शंकराचार्य जी गौ माता की स्थिति को लेकर अत्यंत चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण केवल राजनीतिक नारा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर गंभीरता से कार्य किए जाने की आवश्यकता है।
अखिलेश यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के लिए धर्म नहीं बल्कि धन और वोट प्राथमिकता हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपने राजनीतिक हितों के अनुसार धार्मिक मुद्दों पर अपना रुख बदलती रहती है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया के सनातनी इस बात से चिंतित हैं कि जिस प्रकार अयोध्या में प्रभु श्रीराम की मयार्दा और धार्मिक आस्थाओं को राजनीतिक स्वार्थ से जोड़ा गया है, उससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी या चोरी से बड़ा कोई पाप नहीं हो सकता।
विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इस जांच की निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी सामने आई है कि एसआईटी के एक सदस्य के विरुद्ध भी धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज है। ऐसे में पूरे मामले की जांच पर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक है।
यादव ने कहा कि यह केवल किसी एक प्रकरण की जांच नहीं बल्कि सत्ता के विभिन्न केंद्रों के बीच टकराव का मामला भी प्रतीत होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेताओं के विरुद्ध लगातार छापेमारी और मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जबकि विपक्ष की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के नाम पर प्रतिशोध की राजनीति नहीं होनी चाहिए। आज जो सत्ता में हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन होता रहता है। राम मंदिर प्रकरण पर उन्होंने कहा कि सांचा नहीं पूरा ढांचा बदलना चाहिए, सनातनी बहुत दु:खी हैं। यानि केवल औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी बल्कि पूरी व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए, क्योंकि इस पूरे घटनाक्रम से सनातन धर्म को मानने वाले करोड़ों लोग आहत हुए हैं।
