Dainik Athah

24 वर्षों की मेहनत का फल अब मिला ‘नीरज सिंह’ को

कड़ी मेहनत और पार्टी के प्रति समर्पण नव नियुक्त प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह की पहचान

2002 से 2026 तक एक कार्यकर्ता का अटूट विश्वास, संघर्ष और समर्पण


अशोक ओझा
लखनऊ/ गाजियाबाद।
भारतीय जनता पार्टी के युवा नेता नीरज सिंह को आखिरकार वर्षों की सेव एवं पार्टी के प्रति समर्पण का फल अब 24 वर्ष बाद जाकर मिला है।
रक्षा मंत्री रजनाथ सिंह के पुत्रों नोएडा विधायक पंकज सिंह और नीरज सिंह को लोग खासकर उनके विरोधी रजनाथ सिंह के पुत्र के तौर पर देखते हैं। उनके संगठन के प्रति अटूट विश्वास, संघर्ष और समर्पण की तरफ शायद ही कोई ध्यान देता होगा। पंकज सिंह को जब भाजपा का प्रदेश महामंत्री बनाया गया था उस समय भी भाजपा के कुछ लोगों ने उनका विरोध किया था। लेकिन पार्टी के प्रति उनका समर्पण एवं कार्यकर्ता के रूप में बगैर रूके, बगैर थके काम करना उन्हें अन्य से कुछ अलग करता है।
ठीक यहीं स्थिति नीरज सिंह की रही है। नीरज सिंह ने वर्ष 2002 में हैदरगढ़ विधानसभा (बाराबंकी) के चुनाव प्रचार के दौरान एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में संगठन के साथ जो यात्रा प्रारम्भ हुई थी, वह आज 2026 में भी उसी निष्ठा, ऊर्जा और समर्पण के साथ निरंतर जारी है। लेकिन चूंकि पिता भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेता के साथ ही उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री, भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री, गृह मंत्री एवं अब देश के रक्षा मंत्री है।
इतना बड़ा कद होने के बावजूद राजनाथ सिंह अपने पुत्रों को आगे बढ़ाने के लिए कोई पैरवी नहीं करते।

बेटों की सिफारिश नहीं करते राजनाथ सिंह


मुझे याद है कि एक बार पंकज सिंह को लेकर बात हो रही थी। मैंने उनसे कहा कि- जब सभी नेता अपने बेटों के लिए पैरवी करते हैं तो आप क्यों नहीं करते, इस पर उन्होंने कहा यदि बेटे मेहनत करेंगे और जनता की सेवा करेंगे तो पार्टी खुद सोचेगी। मैं सिफारिश नहीं करने वाला। इसके बाद वहीं हुआ पंकज सिंह ने प्रदेश मंत्री, महामंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ ही नोएडा से लगातार दूसरी बार विधायक का सफर तय किया।

पंकज सिंह खुद अलग हुए थे प्रदेश टीम से


पंकज सिंह ने करीब दो माह पहले ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात के दौरान स्पष्ट कर दिया था कि वे प्रदेश टीम में रहने के इच्छुक नहीं है। उन्होंने कहा था कि वे 20 वर्ष तक प्रदेश टीम का हिस्सा रहे हैं, अब अन्य कार्यकर्ताओं को मौका मिलना चाहिये।

24 वर्ष की तपस्या का फल अब मिला नीरज सिंह को


नीरज सिंह पिछले 24 वर्ष से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता की भांति जनसेवा और में जुटे थे। राजनाथ सिंह जब 2002 में हैदरगढ़ से चुनाव लड़े थे उस समय पहली बार नीरज सिंह मैदान में उतरे थे। इसके बाद से वे लगातार कार्यकर्ता बनकर पार्टी की सेवा में लगे हैं। इन 24 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने, समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाने तथा संगठन को सशक्त बनाने का प्रयास सदैव उनकी प्राथमिकता रहा है। पद और प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर एक कार्यकर्ता के रूप में संगठन के लिए कार्य करना उनका स्वभाव बन गया।
राजनाथ सिंह और पंकज सिंह के साथ नीरज सिंह बगैर पद के भी कार्यकर्ताओं के लिए हर क्षण खड़े नजर आते हैं। लखनऊ तो अब राजनाथ सिंह का कार्यक्षेत्र है। उन्होंने 2009 का चुनाव गाजियाबाद से लड़ा था। लेकिन गाजियाबाद के अधिकांश कार्यकर्ता अब भी किसी भी काम के लिए उनका ही दरवाजा खटखटाते हैं। उन्हें भरोसा रहता है कि तीनों में से कोई न कोई तो अवश्य मिलेगा जो उनकी समस्या को दूर करेगा। कार्यकर्ता की यह उम्मीद पूरी भी होती है जब उसकी समस्या का समाधान उस घर से होता है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *