क्या बच सकती थी सोनू जाटव की जान?
– कमिश्नर को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मदद की मांग
अथाह संवाददाता,
गाजियाबाद। नंदकिशोर गुर्जर ने सोनू जाटव हत्याकांड को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पुलिस आयुक्त गाजियाबाद को पत्र भेजकर मामले में स्थानीय पुलिस की लापरवाही, भ्रामक थ्योरी और आरोपियों को बचाने के प्रयास का आरोप लगाया है।
विधायक ने कहा कि अखबारों में प्रकाशित पुलिस का पक्ष सत्य से परे और भ्रामक है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राथमिकी पुलिस ने स्वयं लिखवाकर हस्ताक्षर करवाए और इसमें दर्जनों महिला-पुरुषों की बजाय चुनिंदा नाम शामिल किए गए। साथ ही गैर इरादतन हत्या की धारा लगाए जाने पर भी सवाल उठाए गए।
समय रहते कार्रवाई होती तो बच सकती थी जान
पत्र में विधायक ने कहा कि 25 अप्रैल को रुखसाना और असलम के मकान को लेकर मारपीट की घटना हुई थी, जिसकी सूचना चौकी में दी गई थी। यदि पुलिस समय रहते विवाद सुलझा देती तो सोनू जाटव की हत्या नहीं होती।
उन्होंने आरोप लगाया कि घायल सोनू का मेडिकल तक नहीं कराया गया, जिसके कारण इलाज में देरी हुई और अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े। विधायक के अनुसार इसी लापरवाही के चलते सोनू जाटव की दुखद मृत्यु हुई।
पुलिस की थ्योरी पर उठे सवाल
नंदकिशोर गुर्जर ने कहा कि पुलिस द्वारा जमीन कब्जे के शक में हत्या की बात कहना पूरे मामले को दूसरा रंग देने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि समीर, शाहरुख व अन्य लोग मकान पर कब्जा जमाने और क्षेत्र में धाक बैठाने के उद्देश्य से योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम देने में शामिल थे।
उच्चस्तरीय जांच और आर्थिक सहायता की मांग
विधायक ने पुलिस आयुक्त से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही गरीब परिवार को आर्थिक सहायता और त्वरित न्याय दिलाया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके समझाने और न्याय के आश्वासन के बाद ही आक्रोशित समाज ने मृतक का अंतिम संस्कार किया।
