दादरी में रैली के जरिये सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चला बड़ा दाव
मुस्लिमों के साथ ही दलितों- गुर्जरों पर भी है अखिलेश यादव की नजर
प्रधानमंत्री मोदी- सीएम योगी के बाद अखिलेश ने भी पश्चिमी उप्र से शुरू किया चुनावी अभियान

अशोक ओझा
गाजियाबाद/नोएडा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा के अगले ही दिन जिस प्रकार सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गौतमबुद्धनगर जिले की धरती से अपना चुनावी शंखनाद किया है उससे यह तय है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही भाजपा- सपा के बीच जंग का मैदान बनेगी। इस रैली के माध्यम से अखिलेश यादव ने राजकुमार भाटी का महत्व भी बढ़ाया है। भाटी को गुर्जर चेहरे के रूप में वे आगे करना चाहते हैं।
बता दें कि रविवार को गौतमबुद्धनगर जिले के जेवर क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। यहीं पर उन्होंने एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी जनसभा को संबोधित किया था। दोनों ने यहां से विपक्ष पर जमकर निशाना साधने के साथ ही एयरपोर्ट से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को होने वाले लाभ गिनाये थे। विपक्ष उनके निशाने पर इसलिए भी था कि अगले ही दिन सोमवार को इसी जिले के दादरी में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की बड़ी जनसभा होनी थी। भाजपा ने जनसभा को सफल बनाने के लिए इस बार पूरी ताकत लगाई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जहां भाजपा पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की, वहीं दो बार प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी नोएडा पहुंचे। प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह तो कई दिनों तक उन जिलों में रहे जहां से जनसभा में लोग आने थे।
इसके दूसरे दिन जिस प्रकार अखिलेश यादव की दादरी जनसभा में भीड़ जुटी उसने भाजपा खेमे में भी हलचल बढ़ा दी है। इसका अंदाजा इस बात से लगता है कि अखिलेश यादव की जनसभा के बाद सीएम योगी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने अखिलेश यादव एवं सपा पर ताबडतोड़ हमले करने शुरू कर दिये।
भाजपा जहां अपने पुराने समीकरणों पर भरोसा कर रही है, वहीं सपा की नजर पीडीए पर है। रैली के जरिये सपा प्रमुख ने अल्पसंख्यक, दलित एवं गुर्जर यानि पीडीए समीकरण को साधने का काम किया है। सपा की नजर पश्चिम के गुर्जर वोट बैंक पर अधिक है। यहीं कारण है कि सपा प्रवक्ता एवं गौतमबुद्धनगर जिले में असरदार राजकुमार भाटी को रैली का संयोजक बनाया गया। भाटी की छवि स्वच्छ है। इसके साथ ही मंच पर जिस प्रकार इकरा हसन, अतुल प्रधान एवं नसीमुद्दीन सिद्दकी को महत्व दिया गया वह भी यहीं बताता है कि अखिलेश की नजर गुर्जर वोट बैंक को भाजपा- रालोद गठबंधन से छिनने की है।
इसका कारण यह है कि गुर्जर वोट बैंक पर भाजपा- रालोद गठबंधन की मजबूत पकड़ मानी जाती है। यदि देखें तो दादरी विधायक जहां गुर्जर समाज से है, वहीं लोनी के विधायक नंद किशोर गुर्जर की छवि गुर्जर नेता के साथ ही हिंदू नेता की भी है। खतौली विधायक मदन भैया के साथ रालोद सांसद चंदन चौहान भी गुर्जर समाज का बड़ा चेहरा है। वहीं, भाजपा में गुर्जर समाज के बड़े चेहरे सुरेंद्र सिंह नागर है जिन्हें राज्यसभा भेजा गया तो नरेंद्र सिंह भाटी का विधानपरिषद। इन सबका मुकाबला सपा राजकुमार भाटी एवं अतुल प्रधान से करना चाहती है।
दो दिन में भाजपा- सपा की बड़ी जनसभाओं ने यह तय कर दिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश जंग का मैदान बनेगी।
