Dainik Athah

बजट 2026–27: योगी सरकार का सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड के साथ स्केलेबिलिटी पर फोकस

नव निर्माण के नौ वर्ष



वैश्विक निवेशकों के लिए बड़ा अवसर, उत्तर प्रदेश में 5 गीगावाट डाटा सेंटर क्लस्टर की होगी स्थापना


₹200 करोड़ का प्रावधान, स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन होगी नोडल एजेंसी

एआई आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था को मिलेगा संस्थागत ढांचा


उत्तर प्रदेश में स्टेट डाटा अथॉरिटी की स्थापना, स्टेट डाटा सेंटर 2.0 की भी होगी स्थापना


‘टेक युवा–समर्थ युवा’ योजना के अंतर्गत 25 लाख युवाओं को एआर/वीआर प्रशिक्षण


उत्तर प्रदेश रोबोटिक्स मिशन के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान, एआई-सीओई एवं आईटीआई में एआई डाटा लैब्स की स्थापना


केंद्र सरकार की शीमार्ट योजना की तर्ज पर मुख्यमंत्री महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना की घोषणा


उद्योगों के लिए ‘जन विश्वास सिद्धान्त’ का होगा अमल, 40 लाख नलकूप होंगे सोलराइज

अथाह ब्यूरो, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रदेश सरकार ने बजट 2026–27 में प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। बजट में 5 गीगावाट क्षमता के 4–5 डाटा सेंटर क्लस्टर स्थापित करने की योजना की घोषणा की गई है, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रारंभिक प्रावधान किया गया है। इस परियोजना के क्रियान्वयन हेतु स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की प्रमुख प्रेरक शक्ति होगा और डाटा सेंटर इस नई अर्थव्यवस्था की आधारभूत संरचना हैं। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने दीर्घकालिक दृष्टि के साथ चरणबद्ध विकास का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रथम चरण में वर्ष 2030 तक 5 गीगावाट क्षमता विकसित करने तथा वर्ष 2047 तक इसे 40 गीगावाट तक विस्तारित करने का विजन रखा गया है।
वर्तमान परिदृश्य में भारत विश्व के बड़े डाटा उत्पादक देशों में शामिल है, किंतु डाटा सेंटर क्षमता के मामले में वैश्विक हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की यह पहल राष्ट्रीय डिजिटल स्वायत्तता और निवेश आकर्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बजट में स्पष्ट किया गया है कि डाटा सेंटर क्लस्टर विकास के लिए भूमि, गुणवत्तापूर्ण एवं सस्ती विद्युत आपूर्ति, पर्याप्त जल संसाधन, उच्च क्षमता वाली बैण्डविथ तथा कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही त्वरित स्वीकृति प्रणाली और निवेशक-अनुकूल नीतिगत वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया है। प्रदेश सरकार का आकलन है कि डाटा सेंटर स्थापना पूंजी-गहन क्षेत्र है, जिसमें प्रति मेगावाट 70–80 करोड़ रुपये तक का निवेश संभावित है। ऐसे में यह परियोजना प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर निवेश, रोजगार सृजन और सहायक उद्योगों के विकास को गति दे सकती है।
बजट में यह भी संकेत दिया गया है कि जहां-जहां डाटा सेंटर क्लस्टर स्थापित होंगे, वहां समेकित डिजिटल टाउनशिप और नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाएगा। इससे स्टार्टअप, आईटी सेवाओं, क्लाउड कम्प्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और एआई आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री के संबोधन में व्यक्त डिजिटल भविष्य के विजन के अनुरूप यह बजट प्रावधान उत्तर प्रदेश को पारंपरिक औद्योगिक विकास से आगे बढ़ाकर प्रौद्योगिकी आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में ले जाने का संकेत देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि प्रस्तावित योजना समयबद्ध तरीके से क्रियान्वित होती है तो उत्तर प्रदेश आने वाले दशक में देश के अग्रणी डाटा सेंटर हब के रूप में उभर सकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान समय की सबसे तीव्र गति से विकसित हो रही तकनीक है और डाटा सेंटर इसकी “फैक्ट्री” के रूप में कार्य करते हैं, जहां इंटेलिजेंस का निर्माण होता है। विश्व स्तर पर अमेरिका (लगभग 54 गीगावाट), चीन (20 गीगावाट) और यूरोप (13 गीगावाट) डाटा सेंटर क्षमता में अग्रणी हैं, जबकि भारत में वर्तमान स्थापित क्षमता मात्र 1.6 गीगावाट है, जबकि देश विश्व के लगभग 20 प्रतिशत डाटा का सृजन करता है और वैश्विक डाटा सेंटर क्षमता में उसकी हिस्सेदारी केवल 2–3 प्रतिशत है। बढ़ती वैश्विक मांग, गूगल और अन्य बड़ी कंपनियों के निवेश प्रस्तावों तथा एआई आधारित अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार को देखते हुए उत्तर प्रदेश के लिए यह ऐतिहासिक अवसर है कि वह डाटा सेंटर क्लस्टर विकसित कर स्वयं को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाए। प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण एवं सस्ती बिजली, पर्याप्त भूमि, जल संसाधन और तकनीकी मानव संसाधन उपलब्ध हैं, जो डाटा सेंटर स्थापना के लिए आवश्यक आधारभूत शर्तें हैं। इस परिप्रेक्ष्य में प्रस्ताव है कि प्रदेश में निवेश आकर्षण हेतु प्रमुख वैश्विक कंसल्टिंग फर्मों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए तथा जहां क्लस्टर स्थापित हों वहां समेकित डिजिटल टाउनशिप विकसित की जाए। 
*उत्तर प्रदेश में स्टेट डाटा अथॉरिटी की स्थापना*“डाटा इज द न्यू ऑयल” की अवधारणा को मूर्त रूप देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सटीक, समेकित और रियल-टाइम आंकड़ा प्रबंधन की दिशा में स्टेट डाटा अथॉरिटी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि वर्ष 2029 तक एक ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी के लक्ष्य को ठोस नीति-निर्धारण के माध्यम से हासिल किया जा सके। वर्तमान व्यवस्था में विभिन्न विभागों द्वारा एक ही पैरामीटर के आंकड़े बार-बार जिला, तहसील, ब्लॉक और ग्राम स्तर से अलग-अलग संकलित किए जाते हैं, जिससे आंकड़ों में असंगति और भिन्नता देखने को मिलती है। कई बार जमीनी स्थिति और विभागीय डेटा में अंतर स्पष्ट रूप से सामने आता है। अधिकांश योजनाओं के आंकड़े अभी भी सैम्पल सर्वे पर आधारित होते हैं, जबकि आईटी, मोबाइल और इंटरनेट के व्यापक विस्तार के इस युग में प्रत्येक लाभार्थी स्तर तक रियल-टाइम डेटा संग्रह संभव है। स्टेट डाटा अथॉरिटी का उद्देश्य विभिन्न विभागों के डेटा को एकीकृत कर एक विश्वसनीय, अद्यतन और विश्लेषण योग्य डेटा प्लेटफॉर्म तैयार करना होगा, जिससे नीति निर्माण अधिक सटीक, पारदर्शी और परिणामोन्मुख हो सके तथा योजनाओं के प्रभाव का वास्तविक आकलन कर प्रदेश के समग्र विकास को गति दी जा सके।
*स्टेट डाटा सेंटर 2.0 की स्थापना*प्रदेश में एक नवीन, आधुनिक, विस्तारित क्षमता युक्त तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ‘स्टेट डाटा सेंटर 2.0’ स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र राज्य के सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म और विभागीय डाटा का सुरक्षित एवं एकीकृत प्रबंधन सुनिश्चित करेगा। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। यह कदम डिजिटल सुरक्षा, डाटा प्रबंधन और क्लाउड सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
*‘टेक युवा–समर्थ युवा’ योजना: 25 लाख युवाओं को एआर/वीआर प्रशिक्षण*डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के समानांतर कौशल विकास पर भी सरकार ने विशेष जोर दिया है। ‘टेक युवा–समर्थ युवा योजना’ के अंतर्गत प्रदेश के 25 लाख युवा एवं छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी आधुनिक तकनीकों, ऑगमेंटेड रिएलिटी (एआर), वर्चुअल रिएलिटी (वीआर) एवं एक्सटेंडेड रिएलिटी (ईआर) में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रदेश में पूर्व में वितरित टैबलेट्स के माध्यम से युवाओं को उन्नत एप्लीकेशन आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रत्येक क्षेत्र और उद्योग के लिए आधुनिक तकनीकी कौशल विकसित करना तथा युवाओं को भविष्य उन्मुख रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। इस योजना के लिए भी वित्तीय वर्ष 2026-27 में 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य तकनीकी दक्षता के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और एआई आधारित उद्योगों के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करना है।
*उत्तर प्रदेश नई और उभरती टेक्नोलॉजी मिशन* उत्तर प्रदेश को रोबोटिक्स, फोटोनिक्स एवं एडवांस्ड/एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसी नई और अन्य उभरती तकनीकों के अनुसंधान, विकास, उद्यमिता एवं कौशल विकास का केंद्र बनाने हेतु आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के माध्यम से ‘उत्तर प्रदेश नई और उभरती टेक्नोलॉजी मिशन’ का वित्तीय वर्ष 2026-27 में आरंभ किया जा रहा है। इस मिशन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। 
*उत्तर प्रदेश रोबोटिक्स मिशन के लिए 100 करोड़ रुपये*नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में रोबोटिक्स का मजबूत इकोसिस्टम विकसित हो रहा है। इस क्षेत्र में एडवर्ब जैसी अग्रणी कंपनियां कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश को रोबोटिक्स हब के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ‘उत्तर प्रदेश रोबोटिक्स मिशन’ लॉन्च कर रही है। इस महत्वाकांक्षी पहल के लिए बजट 2026-27 में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप और इंडस्ट्री सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
*एआई-सीओई एवं आईटीआई में एआई डाटा लैब्स की स्थापना*प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कौशल और अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार के सहयोग से 03 सेंटर फॉर एक्सीलेंस (एआई-सीओई) तथा 49 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में एआई डाटा लैब्स स्थापित किए जाएंगे। यह केंद्र पोषित योजना के अंतर्गत संचालित होगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए 32.82 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था की गई है। इन संस्थानों के माध्यम से युवाओं को एआई, डाटा एनालिटिक्स और उभरती तकनीकों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे प्रदेश में उच्च तकनीकी मानव संसाधन तैयार हो सके।
*यूपीस्वान-3 से डिजिटल गर्वनेंस होगा सुदृढ़*डिजिटल गवर्नेंस को सुदृढ़ करने की दिशा में ‘यूपीस्वान-3’ योजना के अंतर्गत राज्य के अंतिम छोर तक स्थापित शासकीय कार्यालयों को उच्च स्तर की बैंडविड्थ उपलब्ध कराई जाएगी। इससे ई-ऑफिस, ऑनलाइन सेवाओं और रियल-टाइम डाटा ट्रांसफर की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा। इस परियोजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 117.63 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह पहल प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता को नई मजबूती देगी।
*लखनऊ और गौतमबुद्ध नगर में यू-हब की स्थापना*प्रदेश को प्रतिस्पर्धी नवाचार एवं स्टार्टअप केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से लखनऊ तथा गौतमबुद्ध नगर में ‘यू-हब’ की स्थापना की जाएगी। प्लग एंड प्ले मॉडल पर आधारित यह हब इन्क्यूबेशन, एक्सेलेरेशन, अनुसंधान, विकास और सहयोग कार्यक्रमों का संचालन करेगा। तेलंगाना, ओडिशा, केरल और कर्नाटक की तर्ज पर इसे विश्वस्तरीय नवाचार केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था की गई है। यह पहल प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति और टेक-आधारित उद्योगों को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
*डबल इंजन की डबल स्पीड, मुख्यमंत्री महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना की घोषणा*डबल इंजन की सरकार डबल स्पीड से काम कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा शी मार्ट की स्थापना के निर्णय के बाद योगी सरकार प्रमुख स्थानों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टेशनों, एयरपोर्ट और बड़े बाजारों में शोरूम और डिस्प्ले सेंटर स्थापित करेगी। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से लगभग 1 करोड़ महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों तथा अन्य महिला उद्यमियों द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। बड़े शहरों में लिए जाने वाले दुकानों और डिस्प्ले सेंटर का किराया प्रारंभिक तीन वर्षों तक राज्य सरकार वहन करेगी, जिसके बाद स्वयं सहायता समूह या महिला उद्यमी स्वयं किराया अदा करेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रथम चरण में प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर एक मार्केट या शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा, जहां महिला उद्यमियों के उत्पादों के विपणन की व्यवस्था होगी। इन दुकानों का आवंटन और संचालन 100 प्रतिशत महिलाओं द्वारा किया जाएगा। शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण राज्य सरकार अपने बजट से करेगी और दुकानों का आवंटन नाममात्र के किराए पर रोस्टर प्रणाली के तहत किया जाएगा। इस योजना के लिए 100 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था की गई है।
*मुख्यमंत्री डिजिटल इन्टरप्रन्योर योजना*प्रदेश में 8,000 न्याय पंचायतें और लगभग 58,000 ग्राम पंचायतें हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हाई स्पीड इंटरनेट, ओटीटी और डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकार पहले चरण में प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर पर डिजिटल इन्टरप्रन्योर तैयार करेगी। युवाओं (महिला एवं पुरुष) को प्रशिक्षण के साथ आवश्यक उपकरणों हेतु 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। यह ऋण 5 वर्षों में चुकाया जाएगा और पहला वर्ष मोरेटोरियम अवधि का होगा। योजना में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कम से कम 50 प्रतिशत इन्टरप्रन्योर महिलाएं हों। इससे डिजिटल हेल्थ और डिजिटल एजुकेशन को भी मजबूती मिलेगी।
*कृषि एक्सपोर्ट सपोर्ट मिशन*उत्तर प्रदेश कृषि, उद्यान और संबद्ध क्षेत्रों में देश ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। कृषि उत्पादों के निर्यात को सशक्त बनाने और किसानों को वैश्विक गुणवत्ता मानकों से परिचित कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ‘कृषि एक्सपोर्ट सपोर्ट मिशन’ लॉन्च कर रही है। इससे नई तकनीकों को अपनाने, उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शीघ्र प्रारंभ होने से कृषि निर्यात को अतिरिक्त गति मिलेगी। इस मिशन के लिए बजट 2026-27 में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
*उद्योगों के लिए ‘जन विश्वास सिद्धान्त’*पिछले आठ वर्षों में निवेश और उद्योगों को सुरक्षा व संरक्षा का भरोसा देने के बाद अब सरकार ‘जन विश्वास सिद्धान्त’ लागू करने जा रही है। यह सिद्धान्त 53 विभागों के अधीन संचालित अधिनियमों, नियमों और आदेशों पर लागू होगा। इसका मूल दर्शन है,विश्वास आधारित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क। यानी लाइसेंसिंग, रजिस्ट्रेशन और निरीक्षण निवेश व उद्योग की प्रकृति के अनुसार होंगे। केवल वे गतिविधियां जिनका संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा, मानव स्वास्थ्य या पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव से है, उन्हीं पर कठोर नियामकीय प्रावधान लागू होंगे। अन्य गतिविधियों को सामान्यतः परमिशन-फ्री मानने की दिशा में काम होगा। छोटी त्रुटियों पर आपराधिक अभियोजन समाप्त करने, कम्प्लायंस लागत घटाने और प्रक्रियाओं को पूर्णतः डिजिटल बनाने की तैयारी है। एक विभाग को दी गई सूचना अन्य विभागों को स्वतः उपलब्ध हो इसके लिए भी एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा। इस पूरी व्यवस्था को लागू करने के लिए स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के अंतर्गत विशेष टीम गठित की जाएगी और ₹10 करोड़ का प्रारंभिक बजट प्रस्तावित है।
*मातृ स्वास्थ्य पर बड़ा दांव, एसडीजी लक्ष्य 20 पर लाने की तैयारी*  प्रदेश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 141 (एसआरएस 2021-23) है, जबकि केरल में यह 18 के आसपास है। एसडीजी लक्ष्य 2030 तक इसे 70 पर लाने का है, लेकिन राज्य सरकार इसे 20 से नीचे लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित कर रही है। प्रदेश में हर वर्ष लगभग 60 लाख डिलीवरी होती हैं, जिनमें 40 लाख सरकारी अस्पतालों में होती हैं। संस्थागत प्रसव दर 83.4 प्रतिशत (NFHS-5) है, जिसे 100 प्रतिशत तक ले जाने की रणनीति तैयार की जा रही है। ‘मुख्यमंत्री मातृत्व सुरक्षा संकल्प योजना’ के तहत ₹1000 करोड़ का कोष बनाने का प्रस्ताव है। प्रत्येक जिले में 2-3 अस्पतालों को स्पेशलाइज्ड डिलीवरी सेंटर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। एन्टीनेटल चेकअप को भी प्राथमिकता दी जाएगी। सामान्य व हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में 9 तक जांच सुनिश्चित करने और प्रति जांच ₹400 की दर से इम्पैनल्ड अस्पतालों को भुगतान की व्यवस्था प्रस्तावित है। ग्राम पंचायतों में उपलब्ध वल्नरेबिलिटी रिडक्शन फंड (कुल अनुमानित ₹900 करोड़) को जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं की आपात सहायता में उपयोग करने का मॉडल भी तैयार किया गया है, जिसमें राज्य सरकार ब्याज भार वहन करेगी।
*40 लाख नलकूप होंगे सोलराइज*उत्तर प्रदेश की 75 प्रतिशत भूमि पर कृषि कार्य होता है और 86 प्रतिशत कृषि भूमि सुनिश्चित सिंचाई से आच्छादित है। कुल सिंचाई क्षेत्र का 73 प्रतिशत हिस्सा ट्यूबवेल से सिंचित है जो 40 लाख निजी नलकूपों पर आधारित है। इनमें 17 लाख विद्युत चालित और 23 लाख डीजल संचालित हैं। सरकार इन सभी निजी नलकूपों के सोलराइजेशन का प्रस्ताव तैयार कर रही है। इससे डीजल आयात में कमी, किसानों की लागत में गिरावट और पर्यावरणीय लाभ सुनिश्चित होंगे। अनुमानित कुल व्यय ₹1.80 लाख करोड़ आंका गया है। प्रारंभिक चरण में ₹2000 करोड़ का बजट प्रावधान संभव है। सोलर पैनल और पंप निर्माण में प्रदेश की कंपनियों को प्राथमिकता देकर नए औद्योगिक अवसर भी सृजित करने की योजना है। आईओटी आधारित निगरानी और ड्रिप/स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को प्रोत्साहन देकर भूजल दोहन पर नियंत्रण का भी खाका तैयार है।ReplyForwardAdd reaction

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