जगद्गुरू परमहंस आचार्य ने कहा या तो काला कानून वापस लो या इच्छा मृत्यु की अनुमति दें
यूजीसी पर बरेली के नगर मजिस्ट्रेट ने दिया इस्तीफा
अथाह टीम
नयी दिल्ली/ लखनऊ। यूजीसी कानून 2026 के विरोध में यूपी पीसीएस के अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे की एक वजह शंकराचार्य के अपमान को भी बताया है। इसके अलावा कवि कुमार विश्वास ने भी इस कानून का विरोध किया है। इसे लेकर भाजपा के भीतर भी असंतोष की स्थिति है। यही कारण है कि रायबरेली और लखनऊ में भाजपा के नेताओं ने इस्तीफे दिए हैं। शिवसेना उद्धव गुट ने भी इस नियम के खिलाफ मोर्चा खोला है। पार्टी सांसद प्रियंका चतुवेर्दी ने कहा कि यह नियम यूनिवर्सिटियों में भेदभाव को बढ़ाएगा। इसके अलावा ब्रजभूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक ने भी इसके प्रति असहमति जाहिर की है। वह भाजपा के विधायक हैं। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने इन नियमों का समर्थन किया है।
यूजीसी नए नियमों के विरोध में उतरीं उद्धव गुट की सांसद प्रियंका चतुवेर्दी। शिवसेना उद्धव गुट की सांसद प्रियंका चतुवेर्दी ने यूजीसी के नए नियमों को भेदभाव करने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि इन नियमों से यूनिवर्सिटियों में भेदभाव कम होने की जगह लगातार बढ़ता जाएगा। वहीं, अयोध्या से जगतगुरु परमहंस ने यूजीसी ने नए नियमों के खिलाफ मोर्चा खोला है। उन्होंने कहा, आज मैंने पीएम मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि या तो आप यूजीसी के नए नियमों को वापस ले लीजिए, नहीं तो मुझे इच्छा मृत्यु दे दीजिए। इन नियमों से ऐसा होगा कि सवर्णों के निर्दोष बच्चों को झूठा फंसा दिया जाएगा। झूठी शिकायत करने वाले को कुछ नहीं होगा। इससे अपराध बढ़ेगा, जातिवाद बढ़ेगा। आपसे बढ़ी आशाएं थीं देश को लेकिन इससे देश में दंगा, फसाद बढ़ेंगे।
समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने यूजीसी के नए नियमों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यूजीसी ने कुछ भी गलत नहीं किया है। यूजीसी ने केवल उन लोगों को शिकायत का अधिकार दिया है, जिनके खिलाफ अन्याय हो रहा था।
पूरे प्रदेश में सड़कों पर उतरा सवर्ण समाज
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में यूजीसी के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज के सैकड़ों लोग पैदल मार्च करते हुए सड़कों पर उतरे और आयोगे के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लिये थे और नारेबाजी कर रहे थे। सवर्ण समाज और छात्र संगठनों का आरोप है कि यह नियम समानता के नाम पर उच्च शिक्षा में विभाजन को बढ़ावा देगा। भाजपा युवा मोर्चा के नेता शिवम मिश्रा के नेतृत्व में आज नवाबगंज बाजार में पैदल मार्च करते हुए सैकड़ों की संख्या में पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने सवर्ण विरोधी यूजीसी नियम वापस लो उच्च शिक्षा में समानता नहीं, विभाजन’ जैसे नारे लगाए और सरकार को साफ चेतावनी दी कि अगर इस बिल पर पुनर्विचार नहीं हुआ तो आंदोलन को और धारदार दिया जाएगा। यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ जौनपुर में सवर्ण आर्मी ने जमकर विरोध किया। प्रदर्शनकतार्ओं का कहना है कि सरकार को इस बिल को वापस लेना चाहिए, ताकि सवर्ण समाज के पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो सके।
इसके साथ ही मंगलवार को वाराणसी जिला मुख्यालय के बाहर जमकर बवाल हुआ। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस नियम को तत्काल वापस लिया जाए। उनका आरोप है कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों में सामान्य वर्ग के छात्रों के शैक्षणिक जीवन पर खतरा मंडराने लगा है।
यूजीसी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन
सामान्य वर्ग के छात्रों ने दिल्ली में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) मुख्यालय के बाहर मंगलवार को प्रदर्शन का आह्वान करते हुए कहा कि आयोग द्वारा जारी नए विनियम परिसरों में अराजकता पैदा कर सकते हैं। प्रदर्शन का आह्वान करने वालों ने छात्रों से एकजुटता की अपील की और बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर अपना विरोध दर्ज कराने का अनुरोध किया। विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने कहा कि नए नियमों से महाविद्यालयों में पूरी तरह अराजकता पैदा हो जाएगी क्योंकि अब प्रमाण का बोझ पूरी तरह आरोपी पर डाल दिया जाएगा और गलत आरोप झेलने वाले छात्रों के लिए कोई सुरक्षा प्रावधान नहीं है। नए विनियम दमनकारी प्रकृति के हैं। पीड़ित की परिभाषा पहले से तय है। परिसर में पीड़ित कोई भी हो सकता है। प्रस्तावित समानता दस्तों का मतलब परिसर के भीतर लगातार निगरानी में रहने जैसा होगा। त्रिपाठी ने यह भी कहा कि दिल्ली के विभिन्न महाविद्यालयों के छात्रों के इस प्रदर्शन में शामिल होने की संभावना है।
इसके साथ ही लखनऊ यूनिवर्सिटी के सामने भी शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन। छात्रों ने लखनऊ यूनिवर्सिटी के सामने जमकर नारेबाजी की है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया है कि हाल ही में नोटिफाई किए गए यूजीसी रेगुलेशन, 2026 का रेगुलेशन उन छात्रों और फैकल्टी की सुरक्षा करने में विफल रहता है जो आरक्षित श्रेणियों से नहीं आते हैं। इसमें कहा गया है कि जाति-आधारित भेदभाव के दायरे को सीमित करके, वॠउ ने प्रभावी रूप से सामान्य या गैर-आरक्षित श्रेणियों से संबंधित व्यक्तियों को संस्थागत सुरक्षा और शिकायत निवारण से वंचित कर दिया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह रेगुलेशन अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 15(1) (धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर राज्य द्वारा भेदभाव पर रोक) के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
यूजीसी के नए नियमों पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने जताई आपत्ति
यूजीसी द्वारा लागू किए गए ‘यूजीसी नियम, 2026’ को लेकर सवर्ण समाज का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने इन नियमों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे छात्रों के बीच भेदभाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कलराज मिश्र ने कहा है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह नियम छात्रों के बीच विभाजन की भावना को बढ़ावा दे सकता है, जिससे समानता और सामाजिक समरसता प्रभावित होगी तथा अलगाववादी प्रवृत्तियों को बल मिल सकता है। उन्होंने सरकार से इस नियम पर पुनर्विचार करने की मांग की।
भाजपा पदाधिकारियों के इस्तीफों का दौर
इसके साथ ही यूपी में भाजपा के पदाधिकारियों ने यूजीसी के नये नियमों के खिलाफ इस्तीफे देने शुरू कर दिये हैं जिससे भाजपा में चिंता बढ़ गई है।
