Dainik Athah

जीडीए के पीले पंजे के नीचे कभी भी रौंद सकती है चौधरी की चौधराहट

अनाधिकृत रूप से विकसित हो रही बालाजी एन्क्लेब कालोनी पर जीडीए की तिरछी नजर

अथाह संवाददाता

गाजियाबाद। कहावत सही है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, गैर कानूनी रूप से कार्य को अंजाम देने वाले कितनी भी उछल कूद कर लें एक न एक दिन शिकंजे में आता जरूर है। अपराध चाहे आर्थिक हो या कोई और वह कायदा कानून को ठेंगा अधिक दिनों तक नहीं दिखा सकता। ऐसा ही एक आपराधिक मामला सामने आया है जीडीए के नियमों के विपरीत कार्य करने वाले एक दबंग कालोनाइजर का जो न सिर्फ जीडीए मानकों को दरकिनार कर अनाधिकृत रूप से कालोनी विकसित कर रहा बल्कि योगी सरकार के फरमानों को भी खूंटी पर टांग दिया। जीडीए प्रवर्तन जोन 1 के राजनगर एक्सटेंशन के समीप नूरनगर गांव की खसरा की किसानों की जमीन पर अवैध रूप से विकसित होने वाली बालाजी एन्क्लेब नामक कालोनी को पूर्व उपाध्यक्ष अतुल वत्स के कार्यकाल में ध्वस्त किया गया था। जीडीए ने बिजली विभाग को भी इंगित किया था कि अवैध कालोनियों का विद्युतीकरण पूरी पड़ताल के बाद ही किया जाए लेकिन अतुल वत्स के तबादले के बाद कालोनाइजर सुनील चौधरी ने सत्ताधारी नेताओं से सम्पर्क किया और एक बार फिर पूरी ताकत और सोची समझी साजिश के तहत नूरनगर के खसरों की भूमि पर प्लॉटिंग शुरू कर दी। लोगों को लुभाने के लिए चौड़ी सड़क चिन्हित कर बिजली पोल लगवा दिए करीब 70-75 बीघा में काटी जा रही बालाजी कालोनी में विद्युतीकरण किया जा रहा है। बताया जा रहा कि कालोनाइजर अलग से ट्रांसफार्मर रखवा रहा है जिसकी पूरी तैयारी है। जिससे क्रेता को कोई शक संदेह न हो। 
कालोनाइजर सुनील चौधरी द्वारा विकसित की जा रही कालोनी के मामले की खबर दैनिक अथाह ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर को संज्ञान में लेते हुए जीडीए की निगाहें तिरछी हुई हैं। सूत्रों की माने तो अवैध रूप से दबंगई में काटी जा रही कालोनी पर प्राधिकरण के पीला पंजा कभी भी चल सकता है। बराबर मिल रही शिकायतों को तथा हो रही किरकिरी से जीडीए अधिकारी गम्भीर हैं और बिना लेआउट पास कृषि भूमि पर हो रही प्लॉटिंग साइड ऑफिस सड़क बाउंड्री पर जीडीए का बुलडोजर कभी भी गरज सकता है जिसमें चौधरी की चौधराहट धराशायी हो जाएगी।60 से 75 हजार वर्ग गज में बिक रहे प्लाटसूत्रों की माने तो किसानों से सस्ती दर पर जमीन लेकर ऊची दर पर लोगों को बेच रहे है। हो रही प्लॉटिंग को कोई बाहरी आदमी न देख सके इसके लिए भारी भरकम गेट लगाया गया है। अंदर बाकायदा ऑफिस बनाया हुआ है। विद्युतीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। प्लॉट लेने वालों की भी गाड़ियां दिखाई देती है। जगह दिखाकर भूमि की कीमत बताई जाती है। भूखंड 60 हजार से लेकर 75 हजार रुपए वर्ग गज बेचे जा रहे है। कुछ बिक चुके हैं। अब देखना यह है कि अवैध कालोनी पर जीडीए का पीला पंजा कब चलता है।

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