भाजपा के नव निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष
संगठन में आमूलचूल परिवर्तन तो मठाधीशों से कैसे पायेंगे पार
अध्यक्ष बनते ही एक टिप्पणी से ब्राह्मणों का विरोध, अब कैसे रोक पायेंगे

अशोक ओझा
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के नव निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्यमंत्री पंकज चौधरी के लिए उत्तर प्रदेश की राह आसान नहीं होने वाली है। उनके सामने एक तरफ संगठन में बदलाव की बड़ी जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी तरफ अध्यक्ष बनने के साथ ही उनकी एक टिप्पणी ने ब्राह्मणों का विरोध है। इस दो धारी तलवार पर वे कैसे प्रदेश भाजपा की नैया पार कर पायेंगे।
पंकज चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पहली कोर कमेटी की बैठक दो दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निवास संपन्न हो चुकी है। इस बैठक में प्रदेश में मंत्रिमंडल में बदलाव के साथ ही संगठन में आमूलचूल परिवर्तन की रूपरेखा बनाई गई। हालांकि बातचीत फौरी तोर पर ही हुई जिसे आगामी समय में अतिंिम रूप दिया जायेगा। इसमें केंद्रीय नेतृत्व जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के अनुरूप काम होगा।
पंकज चौधरी के एक बयान ने भड़का दिया परशुराम के वंशजों को
पंकज चौधरी अध्यक्ष बनने के साथ ही विवादों से घिर गये हैं। विधानसभा सत्र के अंतिम दिन जिस प्रकार भोजन पर ब्राह्मण विधायक बैठे उसने प्रदेश के साथ ही केंद्रीय नेतृत्व की चिंता भी बढ़ा दी। यहीं कारण है कि लगे हाथों पंकज चौधरी को आगे कर बयान दिलवाया गया कि इस प्रकार की अनुशासनहीनता यदि आगे हुई तो बर्दाश्त नहीं होगी तथा कार्यवाही होगी। उनके एक बयान ने आगे में घी डालने का काम किया और प्रदेशभर में भगवान परशुराम के वंशज ब्राह्मण संगठन हुंकार भरने लगे। सोशल मीडिया पर भी ब्राह्मणों ने चौधरी को खुली चेतावनी दे दी। सूत्रों की मानें तो भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को भी यह अंदेशा नहीं था कि पंकज चौधरी के बयान के बाद ब्राह्मणों में इतनी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी। कुछ ब्राह्मण विधायक तो खुली चेतावनी भी दे रहे हैं।
संगठन में बदलाव भी आसान नहीं होगा
इसके साथ ही भाजपा के प्रदेश संगठन में बदलाव भी पंकज चौधरी के लिए आसान नहीं रहने वाला। कुछ पदाधिकारी तो ऐसे हैं जिनके कंधों पर संगठन चल रहा है, जबकि कुछ पदाधिकारी ऐसे हैं जिन्हें बड़े नेताओं का वर्षों से आशीर्वाद मिला हुआ है। वहीं कुछ लोग लंबे समय से उम्मीद लगाये बैठे हैं कि उन्हें भी प्रदेश संगठन में स्थान मिलेगा। लेकिन जो प्रदेश की स्थिति है उसमें वे कितना बदलाव कर पाते हैं यह देखने वाली बात होगी। वर्तमान में जो पदाधिकारी हैं वे क्या अपनी कुर्सी बचा पायेंगे यह भी बड़ा सवाल है।
जब अध्यक्ष खुद एक बैठक में जा सकते हैं दूसरों पर टिप्पणी क्यों!
भाजपा में इस समय एक चर्चा और तेज है कि जब विधानसभा सत्र के अंतिम दिन प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी जिस बैठक में शामिल हुए थे वह क्या अधीकृत थी। बैठक में बैनर भाजपा पश्चिम क्षेत्र का लगाया गया था, लेकिन पश्चिम का कोई भी पदाधिकारी बैठक में मौजूद नहीं था। यहां तक कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कोई भी जिलाध्यक्ष तक मौजूद नहीं था। इस बैठक की शिकायत भी केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच चुकी है, लेकिन पंकज चौधरी ने इसके ऊपर चुप्पी साधी हुई है।
