Dainik Athah

हमें किसी से धर्मनिरपेक्षता का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए : भागवत

वयोवृद्ध और प्रख्यात लेखक रंगा हरि की पुस्तक ‘पृथ्वी सूक्त’ का विमोचन

रंगा हरि जी जैसे विद्वान इस देश में बार -बार पैदा होने चाहिए: आरिफ मोहम्मद खान

अथाह ब्यूरो
नई दिल्ली।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि हमारी पांच हजार साल पुरानी संस्कृति ही धर्मनिरपेक्ष रही है, हमें किसी से धर्मनिरपेक्षता का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
मोहन भागवत गुरुवार को देर शाम यहां अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में वयोवृद्ध और प्रख्यात लेखक रंगा हरि की पुस्तक ‘ पृथ्वी सूक्त’ के विमोचन के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति विविधता में एकता की रही है। हमारे देश में भले ही अलग -अलग मत मतान्तर के लोग रहते हैं लेकिन जब राष्ट्र की बात आती है तो सभी का स्वर एक हो जाता है। हम एक हैं यह वस्तुस्थिति है, हम भिन्न- भिन्न हैं, यह आभास है। भारत दुनिया का सिरमौर देश इसलिए बना कि यहां एकता में ही विविधता है।


संघ प्रमुख ने कहा कि बेहतर समाज बनाने के लिए हमें परसेप्शन और प्रचार पर नहीं बल्कि परीक्षण पर ध्यान देना चाहिए। रंगा हरि की पुस्तक ‘पृथ्वी सूक्त’ के सिखाए रास्ते पर चलकर हम भारत को उसका पुराना गौरव लौटा सकते हैं और अपना जीवन बेहतर बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि मैं 80 के दशक से ही हरि जी को जानता हूं। रंगा उनके पिताजी का नाम था। हरि जी का पूरा जीवन ही शिक्षा ग्रहण में बीता। वह ज्ञान के अद्भुत भंडार हैं। महाभारत के एक- एक पात्र पर उन्होंने पुस्तकें लिखी हैं।
समारोह को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी संबोधित किया। उन्होंने स्वीकार किया कि केरल का राज्यपाल बनने से पहले वह रंगा हरि जी को नहीं जानते थे। बाद में उनकी लिखी एक पुस्तक पढ़ने का सौभाग्य मिला तो उनसे मिलने की उत्कंठा हुई। और जब मिला तो अपने देश पर गर्व हुआ। उन्होंने कहा कि रंगा हरि जी जैसे विद्वान इस देश में बार -बार पैदा होने चाहिए। उनकी स्मरण शक्ति उच्च कोटि की है। राज्यपाल ने कहा कि जीवन का उद्देश्य ज्ञान की प्राप्ति होनी चाहिए, सुख की प्राप्ति नहीं। इस पुस्तक की भूमिका लिखकर मैं खुद को गौरवान्वित महसूस करता हूँ।
‘पृथ्वी सूक्त’ का प्रकाशन किताबवाले ने किया है। किताबवाले प्रकाशन के प्रबंध निदेशक प्रशांत जैन ने कहा कि भारतीय संस्कृति की अस्मिता को बनाये रखने के लिए वह इस तरह की किताबों का प्रकाशन करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर किताबवाले प्रकाशन के तहत 75 पुस्तकों की श्रृंखला का प्रकाशन कार्य चल रहा है। जल्दी ही वह पुस्तकें आप सभी के समक्ष होंगी। इससे पूर्व प्रशांत जैन ने डॉ. मोहन भागवत को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। प्रज्ञा प्रवाह की दिल्ली प्रान्त की सह संयोजिका डॉ. मोनिका अरोड़ा ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को शाल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह, मोहित जैन, राकेश मंजुल, डॉ. अमित राय जैन समेत काफी संख्या में गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।


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